महर्षि विद्या मंदिर, शिलचर में 25 घंटे का त्रिदिवसीय ‘इन-हाउस शिक्षक प्रशिक्षण’ संपन्न

शिलचर, 1 जुलाई। महर्षि विद्या मंदिर, शिलचर में शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास (Continuous Professional Development) के उद्देश्य से आयोजित 25 घंटे का त्रिदिवसीय ‘इन-हाउस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 27 से 30 जून 2026 तक चले इस प्रशिक्षण का आयोजन परम पूज्य महर्षि महेश योगी के आशीर्वाद एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) की भावना के अनुरूप किया गया।

प्रत्येक दिन की शुरुआत गुरु पूजन, टीएम (Transcendental Meditation) सिद्धि कार्यक्रम एवं प्राणायाम से हुई, जिससे पूरे प्रशिक्षण के दौरान सकारात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण बना रहा। कार्यक्रम में स्वागत गीत, दीप प्रज्ज्वलन तथा विद्यालय की प्रधानाचार्य के स्वागत संबोधन के साथ विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यक्तित्व विकास संबंधी सत्र आयोजित किए गए।

प्रथम दिवस पर असम विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में शिक्षक प्रशिक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कछार कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जयदीप बिस्वास ने मूल्य शिक्षा की आवश्यकता एवं चरित्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर अपने विचार रखे। वहीं नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेंमती चौधरी ने विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवनशैली तथा विद्यालयों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर जानकारी दी।

द्वितीय दिवस का प्रमुख आकर्षण भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) पर आधारित सत्र रहा, जिसे विद्यालय की प्रधानाचार्य ने प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं समग्र शिक्षा की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के समाधान में इसकी उपयोगिता बताई। इसके बाद एनआईटी शिलचर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सरोज कुमार विश्वास ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) एवं कम्प्यूटेशनल थिंकिंग पर अत्यंत ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। उन्होंने आधुनिक शिक्षा में एआई के प्रभावी उपयोग तथा तार्किक सोच विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। दोपहर के सत्र में शताक्षी भट्टाचार्जी ने टीएम प्रक्रिया एवं योग के लाभों पर विस्तृत जानकारी दी।

तृतीय दिवस पर विवेकानंद केंद्र विद्यालय, शिलचर के प्राचार्य श्री बिरेन गोसाईं ने आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) विषय पर व्याख्यान देते हुए विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक क्षमता, रचनात्मक सोच एवं समस्या समाधान कौशल विकसित करने की आवश्यकता बताई। इसके बाद डॉ. सुजाता दत्ता गुप्ता ने व्यावसायिक शिक्षा एवं जीवन कौशल को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया।

प्रशिक्षण के अंतिम चरण में विभिन्न विषयों के अनुभवी शिक्षकों द्वारा आदर्श मॉडल कक्षाओं का प्रदर्शन किया गया, जिसमें गतिविधि-आधारित शिक्षण, ऑडियो-वीडियो संसाधनों तथा नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों का प्रभावी प्रदर्शन किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्य ने एमएमसीबी आधारित शिक्षण प्रक्रिया की उपयोगिता पर प्रकाश डाला तथा समाज विज्ञान विभाग द्वारा प्रस्तुत गतिविधियों की सराहना की।

समापन समारोह में शिक्षकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं गीत-संगीत से वातावरण को आनंदमय बना दिया। तीनों दिनों के कार्यक्रम का संचालन श्रीमती विजेता दे पुरकायस्थ ने किया, जबकि समापन सत्र का संचालन श्री मंजूलाल दास ने किया। धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती बिंदु सिंह एवं श्री विराज बनिक ने प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा राष्ट्रगान के साथ 25 घंटे के इस सफल शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

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