शिव कुमार, शिलचर, 28 जून।

“वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शिक्षा विकास परिषद, दक्षिण असम प्रांत की शिक्षा निकाश परिषद द्वारा रविवार को शिलचर स्थित गुरुचरण विश्वविद्यालय के सभागार (ऑडिटोरियम) में एक गरिमामय एवं भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, प्राध्यापकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति से अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद सभी आमंत्रित अतिथियों को मंच पर आसन ग्रहण कराया गया। आयोजकों ने सभी विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्र भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया। पूरे सभागार में राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और शिक्षा के प्रति समर्पण का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर दिलीप कुमार वैद्य ने अपने संबोधन में कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता चेतना, राष्ट्रीय अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को देशभक्ति, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जोड़ने में ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर निरंजन राय ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” भारतीय राष्ट्रवाद की आत्मा है और इसके 150 वर्ष पूरे होना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए विद्यार्थियों से देश और समाज के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर सुरपना राय तथा प्रोफेसर अनुप कुमार दे ने “वंदे मातरम्” के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर विस्तृत बौद्धिक व्याख्यान प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने इस गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को भारतीय विरासत और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण शिक्षा विकास परिषद, दक्षिण असम प्रांत से जुड़े विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा। विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत, समूहगान एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। इसके साथ ही “वंदे मातरम्” विषय पर आयोजित चित्र प्रदर्शनी ने भी सभी का विशेष ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, राष्ट्रप्रेम और भारतीय संस्कृति के प्रति उनकी भावना स्पष्ट रूप से झलक रही थी।
समारोह के दौरान उपस्थित शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों ने “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के इस ऐतिहासिक अवसर को राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान तथा सभी आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापन के साथ हुआ। आयोजन की सफलता में शिक्षा विकास परिषद, दक्षिण असम प्रांत के पदाधिकारियों, विद्वत परिषद के सदस्यों, स्वयंसेवकों एवं विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों और विद्यार्थियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।