प्रीतम दास हाइलाकांदी, २५ जून:
हाइलाकांदी जिले के बोआलीपार स्थित सरकारी पैडी प्रोक्योरमेंट सेंटर (पीपीसी) में धान खरीद प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं तथा सिंडिकेट की सक्रियता के आरोप सामने आए हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान बेचने में असमर्थ होने के कारण जिले के अनेक किसान गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। आरोपों के मद्देनज़र हाइलाकांदी के सहायक आयुक्त एवं कृषि विभाग के शाखा अधिकारी श्री प्रसेनजीत डे (ए.सी.एस.) ने स्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच की।जानकारी के अनुसार चालू सीजन में सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य २३६९ रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है किंतु अनेक किसान इस मूल्य पर अपना धान बेच पाने में असफल रहे हैं। किसानों का आरोप है कि पीपीसी को केंद्र बनाकर एक प्रभावशाली सिंडिकेट सक्रिय है जिसके कारण वास्तविक किसानों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में किसानों से १०० बोरियों से अधिक धान स्वीकार नहीं किया जा रहा है।परिणामस्वरूप उन्हें मजबूर होकर स्थानीय राइस मिलों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ रहा है।किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्व और बिचौलिये फर्जी तरीके से किसान प्रमाणपत्र प्राप्त कर सरकारी खरीद केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान बेच रहे हैं। इससे वास्तविक किसान सरकारी लाभों से वंचित हो रहे हैं।मामला सामने आने के बाद सहायक आयुक्त प्रसेनजीत डे ने बोआलीपार पीपीसी का दौरा किया तथा प्रभावित किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सभी शिकायतों की निर्धारित नियमों के अनुसार जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।इस बीच जिला प्रशासन ने कहा है कि किसानों के हितों की रक्षा तथा धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। किसानों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।उल्लेखनीय है कि किसानों से सीधे धान खरीदकर बिचौलियों और दलालों की भूमिका समाप्त करने के उद्देश्य से सरकार ने पैडी प्रोक्योरमेंट सेंटरों की स्थापना की थी। किंतु हाइलाकांदी के बोआलीपार में यही व्यवस्था अब कथित रूप से सिंडिकेट के प्रभाव में आ गई है, जिससे किसान समुदाय में भारी असंतोष व्याप्त है।