शिलचर, 23 जून। भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 73वीं बलिदान दिवस मंगलवार को शिलचर के श्यामा प्रसाद रोड स्थित उनकी पूर्णाकृति प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। श्यामा प्रसाद स्मारक समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 9 बजे स्थानीय कलाकारों द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत करने के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित अतिथियों एवं नेताओं ने डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
इस अवसर पर सांसद परिमल शुक्लबैद्य, जिला भाजपा अध्यक्ष रूपम साहा, पूर्व विधायक नीहाररंजन दास एवं दीपायन चक्रवर्ती सहित अनेक वरिष्ठ भाजपा नेता, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में सांसद परिमल शुक्लबैद्य ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राजनीतिक जीवन, राष्ट्रभक्ति और देश की एकता-अखंडता के लिए उनके योगदान को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी भारतीय राष्ट्रवादी चेतना के एक उज्ज्वल प्रतीक थे। स्वतंत्र भारत की पहली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उन्होंने उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में पंडित जवाहरलाल नेहरू से वैचारिक मतभेद होने पर उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर एक सशक्त लोकतांत्रिक विपक्ष के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई। यही संगठन आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी के रूप में विकसित हुआ।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के एक प्रभावशाली नेता के रूप में उनकी पहचान इतनी मजबूत थी कि उन्हें “संसद का शेर” कहा जाता था। जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक प्रावधानों के विरोध में उनका प्रसिद्ध नारा— “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे”—आज भी राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता नृत्य भूषण डे ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अखंड भारत के स्वप्नदृष्टा और महान देशभक्त थे। उन्होंने कश्मीर को भारत की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मारक समिति के अध्यक्ष रमापद भट्टाचार्य ने अपने वक्तव्य में बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर 6 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। उन्होंने कहा कि वे असम सरकार से भी इसी प्रकार का अवकाश घोषित करने का अनुरोध करेंगे।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध संगीतकार शांति कुमार भट्टाचार्य ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जबकि तबले पर उत्पल दत्ता ने संगत दी। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष 23 जून को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि को ‘बलिदान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1953 में इसी दिन श्रीनगर में नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ था, जिसे उनके समर्थक राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान मानते हैं।