शिलचर, 19 जून। पूर्वोत्तर भारत की सामाजिक संस्था डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मेमोरियल स्वार्थ सुरक्षा परिषद ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर आम नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं कड़ा बनाने की मांग की है।
परिषद के अध्यक्ष डॉ. हाराण दे ने केंद्रीय गृह मंत्री को भेजे एक ई-मेल में हाल ही में कछार जिले के कटिगड़ा क्षेत्र स्थित किन्नारखाल सीमा पर एक भारतीय किसान के कथित अपहरण की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
अपने पत्र में उन्होंने सीमा पर निगरानी तंत्र को और मजबूत करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों की संख्या बढ़ाने की मांग की। डॉ. दे ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि सीमा पर बीएसएफ की तैनाती और नियमित गश्त के बावजूद कथित तौर पर बांग्लादेशी दुष्कर्मी दिनदहाड़े नाव के माध्यम से नदी पार कर शून्य रेखा (जीरो लाइन) लांघते हुए भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर एक किसान का अपहरण करने में सफल रहे।
उन्होंने गृह मंत्री से यह भी अनुरोध किया कि सीमा पर कांटेदार तारबंदी के बाहर स्थित 150 गज क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाए तथा उन्हें तारबंदी के भीतर सुरक्षित स्थानों पर भूमि और आवास उपलब्ध कराया जाए।
डॉ. दे द्वारा भेजे गए इस ज्ञापन की प्रतिलिपि को भी प्रेषित की गई है।