अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: SIT जांच तेज, करोड़ों की रिकवरी और कई नए सवालों से घिरा मामला

एजेंसी संवाददाता अयोध्या, 17 जून। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बीते दिनों सामने आए आरोपों के बाद राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। इस बीच करोड़ों रुपये की नकदी बरामदगी, संदिग्ध संपत्तियों की जांच और कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने से मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, अब तक जांच एजेंसियों और आंतरिक टीमों द्वारा लगभग 2.98 करोड़ रुपये नकद, कुछ कीमती आभूषण, एक लग्जरी वाहन तथा अन्य सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि आधिकारिक रूप से कुल गबन की राशि घोषित नहीं की गई है, लेकिन जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि वित्तीय अनियमितताओं का दायरा कई करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

SIT की एंट्री के बाद बढ़ी हलचल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित SIT ने 15 जून को राम मंदिर परिसर पहुंचकर जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि टीम ने कई घंटों तक दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी विस्तृत बातचीत की गई।

हालांकि ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। शुरुआती दौर में महासचिव चंपत राय ने मीडिया में सामने आए आरोपों को निराधार बताया था, लेकिन बाद में जांच की प्रक्रिया जारी रहने से विवाद और गहरा गया है।

करीबी सहयोगियों पर बढ़ता संदेह

जांच में कुछ ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं जो लंबे समय से मंदिर प्रबंधन या उससे जुड़े व्यक्तियों के संपर्क में बताए जाते हैं। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सोमेश आनंद और केडी तिवारी के नाम चर्चा में हैं।

सूत्रों का दावा है कि टिन्नू से जुड़े ठिकानों पर हुई कार्रवाई में भारी मात्रा में सोना और अन्य संपत्तियों की जानकारी मिली है। हालांकि बरामद सोने के वजन और मूल्य की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

इसी तरह सोमेश आनंद की पिछले एक वर्ष की यात्रा गतिविधियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि विभिन्न राज्यों की लगातार यात्राओं का उद्देश्य क्या था और उनका वित्तीय लेन-देन से कोई संबंध था या नहीं।

दानपात्र व्यवस्था पर उठे सवाल

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मंदिर के दानपात्रों (डोनेशन बॉक्स) की निगरानी व्यवस्था को लेकर सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि नकद राशि की नियमित गणना और रिकॉर्डिंग तो होती थी, लेकिन दानपात्रों में आने वाले सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के लेखे-जोखे की व्यवस्था अपेक्षाकृत कमजोर थी।

यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह सुरक्षा और लेखा प्रणाली की गंभीर खामी मानी जाएगी, जिसका फायदा उठाकर कथित रूप से अनियमितताएं की गईं।

पुराने मामलों की भी हो रही चर्चा

जांच के दौरान दो वर्ष पुराने उस कथित प्रकरण की भी चर्चा फिर तेज हो गई है जिसमें रामलला और उनके भाइयों के लिए उपयोग किए जाने वाले सोने के मुकुट कुछ समय तक उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई थी। हालांकि इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए इसकी पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है।

सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?

राजनीतिक और धार्मिक हलकों में अब सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता हुई है तो इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होगी। आलोचकों का कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, जबकि ट्रस्ट से जुड़े लोग जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह दे रहे हैं।

निष्कर्ष

राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे और दान राशि से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता का आरोप स्वाभाविक रूप से अत्यंत संवेदनशील विषय बन जाता है। फिलहाल जांच जारी है और कई दावे अभी आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा में हैं। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला सीमित स्तर की चोरी का है, संगठित वित्तीय गबन का है, या फिर आरोपों का दायरा वास्तविकता से अलग है।

जांच पूरी होने तक सभी दावों और आरोपों को सत्यापित तथ्यों के रूप में नहीं, बल्कि जांचाधीन विषय के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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