मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को जागरूक किया गया आईसीएआर केवीके हाइलाकांदी

मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को जागरूक किया गया आईसीएआर केवीके हाइलाकांदी
प्रीतम दास हाइलाकांदी, ७ जून:
मृदा स्वास्थ्य संरक्षण सतत कृषि उत्पादन में वृद्धि तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से देशव्यापी रूप से संचालित ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत रविवार को हाइलाकांदी जिले के मणिपुर ग्राम पंचायत कार्यालय में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन आईसीएआर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) हाइलाकांदी द्वारा जिला कृषि विभाग के सहयोग से किया गया।कार्यक्रम में पाँच गाँवों के कुल ३२ किसानों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त कृषि विभाग एवं केवीके के अधिकारियों ने उपस्थित रहकर किसानों को कृषि से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान कीं।कार्यक्रम के दौरान आईसीएआर केवीके हाइलाकांदी के मत्स्य विज्ञान विभाग के विषय विशेषज्ञ अंगोम बलेश्वर सिंह ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। इसके विपरीत रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक एवं अव्यवस्थित उपयोग से मिट्टी के पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है और लाभकारी सूक्ष्मजीव भी प्रभावित होते हैं।उन्होंने किसानों को जैविक खाद वर्मी कम्पोस्ट हरी खाद तथा अजोला की खेती जैसी पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने विस्तार से बताया कि कृषि भूमि से बहकर जलाशयों में पहुँचने वाले अतिरिक्त उर्वरक एवं पोषक तत्व यूट्रोफिकेशन की समस्या उत्पन्न करते हैं जिससे जलीय पर्यावरण और मत्स्य संसाधनों को नुकसान पहुँचता है।वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों ने नियमित मृदा परीक्षण तथा मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार संतुलित उर्वरकों के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की भी जानकारी दी।
कार्यक्रम में मणिपुर ग्राम पंचायत के उपाध्यक्ष संतोष धुबी भी उपस्थित रहे। किसानों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न जानकारीपूर्ण पर्चों का वितरण किया गया।अंत में आयोजित विचार विमर्श सत्र में किसानों ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञों से विभिन्न समस्याओं के समाधान और आवश्यक परामर्श प्राप्त किया।

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