नशामुक्त शिलचर के दावों के बीच शहर के कई हिस्सों में जारी मादक पदार्थों का सेवन, उठे कई सवाल

नशामुक्त शिलचर के दावों के बीच शहर के कई हिस्सों में जारी मादक पदार्थों का सेवन, उठे कई सवाल

प्रेरणा ब्यूरो शिलचर, 30 मई। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा “नशामुक्त भारत” तथा “नशामुक्त शिलचर” अभियान को सफल बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद शहर के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में मादक पदार्थों के सेवन और अवैध कारोबार की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। विशेष रूप से शिलचर सदर थाना के पीछे स्थित दीवार के आसपास, फाटक बाजार तथा आसपास के बाजार परिसर की इमारतों की छतों पर शाम ढलते ही खुलेआम नशा किए जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस समय-समय पर छापेमारी कर नशीले पदार्थ बरामद करती है और आरोपियों को गिरफ्तार भी करती है, लेकिन कुछ समय बाद वही गतिविधियां फिर शुरू हो जाती हैं। आरोप है कि मादक पदार्थों की अवैध बिक्री और सेवन का सीधा संबंध चोरी, छिनताई तथा अन्य आपराधिक घटनाओं से भी जुड़ा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस द्वारा पकड़े गए कई नशा-आश्रित व्यक्तियों को नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में भेजा जाता है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों का दावा है कि उपचार के बाद भी कई लोग दोबारा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं और अपराध की दुनिया में लौट जाते हैं। इससे पुनर्वास केंद्रों की प्रभावशीलता और उपचार के बाद समाज में पुनर्स्थापन की व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

सामाजिक संगठनों, जागरूक नागरिकों और व्यापारिक समुदाय का मानना है कि केवल नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ना, नियमित रात्रि गश्त बढ़ाना, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी मजबूत करना तथा पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली का समय-समय पर मूल्यांकन करना आवश्यक है।

शहर के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नशे के बढ़ते खतरे पर अंकुश लगाने के लिए कठोर और दीर्घकालिक रणनीति अपनाई जाए, ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सके और शिलचर को वास्तव में नशामुक्त बनाया जा सके।

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