शहीदों की स्मृति में सुराना मोटर्स की मानवीय पहल
हाइलाकांदी में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में तीस से अधिक लोगों ने किया रक्तदान
प्रीतम दास हाइलाकांदी, १९ मई :
१९ मई बराक घाटी के बंगाली समाज के लिए गौरव और भावनाओं से जुड़ा एक ऐतिहासिक दिन है। वर्ष १९६१में इसी दिन बंगला भाषा की मर्यादा और अधिकारों की रक्षा के लिए हुए आंदोलन में ग्यारह भाषा शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनकी पावन स्मृति को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बराक घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में भाषा शहीद दिवस मनाया गया। इसी क्रम में हाइलाकांदी में सुराना मोटर्स द्वारा एक सराहनीय और मानवीय पहल की गई।भाषा शहीदों की स्मृति में सोमवार को हाइलाकांदी नगर के दुर्गाबाड़ी परिसर में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस मानवीय कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिली। युवाओं के साथ साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य तथा आम नागरिकों ने भी स्वेच्छा से रक्तदान कार्यक्रम में भाग लिया। आयोजकों की ओर से बताया गया कि इस अवसर पर तीस से अधिक लोगों ने स्वैच्छिक रक्तदान किया।रक्तदान शिविर को सफल बनाने में सुराना मोटर्स के साथ बराक वैली ब्लड डोनर्स फोरम ने सहयोग प्रदान किया। वहीं रक्त संग्रहण कार्य में हाइलाकांदी एस. के. रॉय सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संपूर्ण कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित वातावरण में सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर हिंदू रक्षी दल के प्रांतीय प्रशासनिक प्रमुख मनोज विश्वास, हिंदू मिलन मंदिर की केंद्रीय समिति के सदस्य मृगेन देव, बराक वैली ब्लड डोनर्स फोरम के अध्यक्ष सुशांत मोहन चटर्जी, नगर पार्षद राजू चक्रवर्ती तथा सुराना मोटर्स के ब्रांच मैनेजर संजीव डे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।उपस्थित वक्ताओं ने भाषा शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि १९ मई केवल एक तिथि नहीं, बल्कि बंगला भाषा और संस्कृति की अस्मिता की रक्षा के संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ साथ मानव सेवा के कार्यों में आगे बढ़ना भी अत्यंत आवश्यक है। इसी भावना से प्रेरित होकर इस रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।वक्ताओं ने समाज के सभी स्वस्थ लोगों से नियमित रूप से रक्तदान करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण मांग को भी दोहराया कि सिलचर रेलवे स्टेशन का नाम परिवर्तित कर भाषा शहीद स्टेशन रखा जाए। वक्ताओं के अनुसार भाषा आंदोलन के इतिहास तथा शहीदों के बलिदान को चिरस्मरणीय बनाए रखने के लिए सरकार को शीघ्र सकारात्मक कदम उठाना चाहिए। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ियों तक भाषा आंदोलन और बंगाली समाज के त्याग एवं गौरवपूर्ण इतिहास को पहुँचाने के लिए यह नामकरण अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी समाज कल्याण एवं मानव सेवा से जुड़े ऐसे कार्यक्रम निरंतर जारी रहेगी।