65वें भाषा शहीद दिवस पर उमड़ा जनसैलाब

65वें भाषा शहीद दिवस पर उमड़ा जनसैलाब

शिलचर ने 11 अमर शहीदों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि


रानु दत्त व चंद्रशेखर ग्वाला, शिलचर, 19 मई।

बराक घाटी के ऐतिहासिक भाषा आंदोलन के 65वें वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोमवार को शिलचर में श्रद्धा, एकता और भावनाओं का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। वर्ष 1961 में मातृभाषा बंगला की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले 11 अमर भाषा शहीदों की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा शहर “मोदेर गरब, मोदेर आशा — आ मरी बांगला भाषा” तथा “एकादश शहीद अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।

सुबह लगभग 7 बजे शिलचर रेलवे स्टेशन स्थित शहीद मीनार से एक विशाल श्रद्धांजलि रैली निकाली गई। यह महा पदयात्रा शहर की विभिन्न सड़कों से गुजरते हुए शिलचर स्वर्गद्वार श्मशान घाट परिसर पहुंची, जहां 1961 के भाषा आंदोलन के शहीदों का अंतिम संस्कार किया गया था। जैसे-जैसे रैली आगे बढ़ती गई, उसमें शामिल लोगों की संख्या भी बढ़ती चली गई और पूरा शहर जनसैलाब में तब्दील हो गया।

इस विशाल पदयात्रा में विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं सहित लगभग पांच हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया। विशेष रूप से विद्यार्थियों और युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कांग्रेस, भाजपा और वाम दलों के नेताओं ने एक मंच पर आकर भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विधायक, सांसद, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, व्यापारी वर्ग, महिलाएं और आम नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस ऐतिहासिक पदयात्रा में कुल 80 संस्थाओं और संगठनों ने सहभागिता की, जिनमें 24 स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय शामिल रहे। प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में निरंजन राय मेमोरियल सरस्वती विद्यानिकेतन, नेताजी विद्या भवन गर्ल्स हाई स्कूल, मालुग्राम गर्ल्स हाई स्कूल, सिस्टर निवेदिता विद्या मंदिर गर्ल्स हाई स्कूल, रामानुज विद्या मंदिर, छोटेलाल सेठ इंस्टीट्यूट, कछार हाई स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल, कछार कॉलेज, गुरुचरण विश्वविद्यालय, प्रणवानंद इंटरनेशनल स्कूल, सर्वोदय हाई स्कूल, ब्लॉजम वर्ल्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रामानुज गुप्ता डिग्री कॉलेज तथा रामानुज सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रमुख रहे।

इसके अलावा अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक और स्वयंसेवी संगठनों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इनमें मॉर्निंग क्लब, सहमर्मी एनजीओ, शाइन एनजीओ, नेताजी छात्र युवा संस्था, पुष्पांगन संगीत कला केंद्र, सर्वभारतीय सिलेटी फोरम ट्रस्ट, बराक वैली वॉलंटरी ब्लड डोनर्स फोरम, दृष्टिकोण, दशरूपक, पतंजलि योगपीठ, लायंस क्लब ऑफ शिलचर केयर, यूथ्स अगेंस्ट सोशल एविल्स (YASI), बराक क्रिएटिव संस्था, आजकेर प्रजन्म, स्वजन एनजीओ सहित कई संगठन शामिल रहे।

इस अवसर पर शिलचर श्मशान घाट स्थित शहीद वेदी तथा शिलचर रेलवे स्टेशन के शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। जिले के सौ से अधिक क्लबों, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न शिक्षण संस्थानों ने कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई। शहर में स्थापित सभी एकादश शहीद वेदियों पर दिनभर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए लखीपुर के विधायक कौशिक राय, शिलचर के विधायक राजदीप राय, पूर्व विधायक दीपायन चक्रवर्ती तथा काठीघोड़ा के विधायक कमलाक्ष दे पुरकायस्थ ने 19 मई 1961 के भाषा आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिलचर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर “भाषा शहीद स्टेशन” करने की मांग की जा रही है। साथ ही भाषा शहीदों के परिवारों को सरकारी सहायता प्रदान करने की दिशा में शीघ्र कदम उठाने का आश्वासन भी दिया गया।

वहीं कांग्रेस नेता शरीफुज्जमान लस्कर ने सरकार से मांग की कि शिलचर रेलवे स्टेशन का नाम तत्काल “भाषा शहीद स्टेशन” घोषित किया जाए तथा भाषा शहीदों के परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। कार्यक्रम में लखीपुर के विधायक कौशिक राय, भाजपा जिला अध्यक्ष रूपम साहा, राज्यसभा सांसद कणाद पुरकायस्थ, विधायक अभिजीत पाल, संजीव राय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

दिनभर शहर में सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बच्चों के लिए चित्रांकन प्रतियोगिता, गीत, नाटक, पथनाट्य, स्मरण सभा एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और भी भावपूर्ण बना दिया। एक दिन पूर्व शहर की विभिन्न सड़कों पर आकर्षक रंगोलियां भी बनाई गई थीं।

इधर लखीपुर क्षेत्र में भी अनेक क्लबों एवं सामाजिक संगठनों ने श्रद्धा और सम्मान के साथ बंगला भाषा शहीद दिवस मनाया। वहां भी विशाल रैलियां निकाली गईं तथा विभिन्न शहीद वेदियों पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। विद्यार्थियों के बीच कई प्रतियोगिताओं का आयोजन कर नई पीढ़ी को भाषा आंदोलन के इतिहास और शहीदों के बलिदान से अवगत कराया गया।

उल्लेखनीय है कि 19 मई 1961 को बंगला भाषा की मान्यता और अस्तित्व की रक्षा के आंदोलन में 11 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनका बलिदान आज भी मातृभाषा, अधिकार और अस्मिता की रक्षा के संघर्ष की अमर प्रेरणा बना हुआ है।

Leave a Comment