राष्ट्र चिंतन- आप के गद्दार जो बन गए भाजपा के आइकॉन

राष्ट्र चिंतन
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 आप के गद्दार जो बन गए भाजपा के आइकॉन

(आचार्य श्रीहरि)
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आप के गद्दार बन गए भाजपा के आइकॉन, भाजपा के लोग अब इनकी चरण वंदना करेंगे। इसी से मिलती जुलती भाजपा पर कुछ आक्रोश और व्यंग्य पूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रियाओ को देखिए। दिवंगत रामबिलास पासवान भाजपा को भारत जलाओ पार्टी कहते थे, भाजपा गठबंधन को लात मारकर अलग हो गए थे, हाशिए पर पहुंचते ही रामबिलास पासवान के लिए भाजपा फिर से आइकॉन बन गई, अपने और अपने बेटे विराग पासवान को भाजपा की छत्र छाया में स्थापित कर लिया। सम्राट चैधरी और उसका बाप शकुनी चैधरी भाजपा को मुस्लिम विरोधी कहते थे, पिछड़े विरोधी कहते थे, ये उस समय कांग्रेस में थे, आज सम्राट चैधरी भाजपा के लिए सुप्रीम आइकॉन बन गए हैं, भाजपा ने उन्हें  बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया। हेमंता शर्मा बिस्वा कभी भाजपा विरोधी नेता थे और भाजपा को असमिया अस्मिता के प्रहारक कहते थे, भाजपा ने उस हेमंता को असम का मुख्यमंत्री बना दिया। नीतीश कुमार का प्रकरण कौन नहीं जानता है, बार बार विश्वास घात और अपमान झेलने के बाद भी भाजपा ने नीतीश कुमार को सिर पर बैठा कर रखा, नीतीश कुमार अब भविष्य के उपराष्ट्रपति है, भाजपा उन्हें भविष्य में उप राष्ट्रपति बनाएगी। दिवंगत अजित पवार घपले के दोषी और कई हजार करोड़ की संपति रखने का अभियुक्त भाजपा मानती थी, अजित पवार के खिलाफ भाजपा आंदोलन भी करती थी,  भाजपा ने उन्हें उप मुख्यमंत्री बना दिया था। कपिल मिश्रा  नरेंद्र मोदी को आईएसआई का एजेंट बताता था। ममता बनर्जी का एक कथन बहुत ही विख्यात है,सटीक है और  भाजपा को भ्रष्ट, अनैतिक, बेईमान साबित करने के लिए प्रेरित करता है, अब यहां यह प्रश्न उठता है कि कि ममता बनर्जी का वह कथन क्या है? ममता बनर्जी बार बार कहती है कि भाजपा वह भ्रष्ट, अनैतिक और बईमान वाशिंग मशीन है जो भ्रष्ट, बईमान, अनैतिक और जनविरोधी नेताओं को ईमानदारी, नैतिक और सुचिता का प्रतीक बना देती है। जगदंबिका  पाल कहते थे कि मोहन भागवत को सीवर टैंक में रखो, वह मनुष्य नहीं बल्कि मानवता के लिए भेड़िया है, आज वही जगदंबिका पाल, पिछले तीन बार से भाजपा के संसद सदस्य हैं, बीजेपी के लोग उसकी चरण वंदना करते हैं। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत्र कहती है कि देश को कांग्रेस मुक्त करने का नरेंद्र मोदी का सपना और राजनीतिक अभियान पूरा नहीं हुआ पर भाजपा भ्रष्ट, बईमान, अनैतिक और जनविरोधी युक्त जरूर हो गई है। सच तो यही है कि बीजेपी के आधे से अधिक सांसद और विधायक गैर भाजपाई और गैर संघ पृष्ठ भूमि के हैं, संघ बीजेपी पृष्ठभूमि के लोग सांसद और विधायक की कसौटी पर हाशिए पर चले गए हैं और उन्हें  दलबदलुओं , बईमान, अनैतिक पृष्ठ भूमि के लोगो की चरण वंदना करनी पड़ती है।
अभी अभी राघव चड्ढा का प्रकरण भी कुख्यात हुआ है। राघव चड्ढा ने ऐसी राजनीतिक मिसाल बनाई है जो अनैतिकता की सारी सीमाएं और हदें तोड़ डाली है।  राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी और अपने गुरु अरविन्द केजरीवाल को ऐसी लंगी मारी है जिससे आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल चारों खाने चित हो गए हैं। राघव चड्ढा ने आश्चर्य चकित करते हुए बीजेपी में शामिल हो गए, वे सिर्फ स्वयं शामिल नहीं हुए बल्कि अपने साथ आप के सात अन्य राज्य सभा के सदस्यों को भी बीजेपी में शामिल कराने का दावा किया है। राघव चड्ढा ने भाजपा में शामिल होने का तर्क जो दिया है वह तर्क धूर्त राजनीति का हथकंडा और  विश्वासघात का पर्याय मात्र है। उसने तर्क दिया कि वे अंतर्रात्मा की आवाज पर भाजपा में शामिल हुए हैं, उन्हें राष्ट्र भक्ति प्रभावित करती हैं, भाजपा राष्ट्रभक्ति की प्रतीक है, राष्ट्रभक्ति भाजपा की सर्वश्रेष्ठ और अतुलनीय है। नरेंद्र मोदी की ईमानदारी और कर्तव्य निष्ठा उन्हें आकर्षित करती है और प्रेरणा देती है, नरेंद्र मोदी ने देश का अतुलनीय विकास किया है, भारत आज विश्व गुरु बन गया है। राघव चड्ढा नरेंद्र मोदी के विकास और भाजपा की राष्ट्र भक्ति में योगदान देना चाहते हैं और सहचर बनना चाहते हैं। इसके विपरीत तथ्य देखिए। जब राघव चड्ढा आप में थे तो बीजेपी और संघ के प्रति उनके विचार क्या थे? राघव चड्ढा के भाजपा और संघ के प्रति विचार बहुत ही खतरनाक, जहरीला था। भाजपा को गुंडों की पार्टी और संघ को सांप्रदायिक कीड़ा कहते थे, नरेंद्र मोदी को अदानी अंबानी का दलाल भी कहते थे, देश को लूटने के लिए अदानी अंबानी को पूरी छूट देने का भी आरोप लगाते थे।
आम आदमी पार्टी की कसौटी पर राघव चड्ढा और उनकी दलबदलू समूह को क्या कहा जाना चाहिए? क्या उन्हें विश्वास घाती कहा जाना चाहिए, क्या उन्हें भस्मासुर कहा जाना चाहिए, क्या उन्हें उन्हें जिस थाली में खाने वाले, उसे थाली में छेद करने वाले कहा जाना चाहिए, क्या उन्हें अनैतिक कहा जाना चाहिए, क्या उन्हें राजनीतिक वैचारिक तौर पर पतित कहा जाना चाहिए, क्या उन्हें राजनीति का बदबूदार उदाहरण का पात्र मान लिया जाना चाहिए? आम आदमी पार्टी ने उन्हें गद्दार कहा है, आत्मा बेचने वाला कहा है, लोभ लालच और डर कर बीजेपी में शामिल होने का आरोप लगाया है। आम आदमी पार्टी की ऐसी भावनाएं समझ में आती हैं, क्योंकि वह आहत है, पीड़ित है और उसकी जमी जमाई पार्टी एक झटके में संकट ग्रस्त हो गई। सबसे बड़ी बात यह है कि राघव चड्ढा और उनके साथ जाने वाले राज्य सभा के सदस्यों का राजनीतिक हैसियत कोई अपनी नहीं है, ये आप के परजीवी थे, ये कोई अपनी पहचान रखने वाले नहीं हैं, ये खुद पराक्रमी नहीं है, ये आप की शुरुआती टीम के सभी सदस्य भी नहीं थे, इन्होंने कोई संघर्ष और आंदोलन नहीं किया था। आम आदमी पार्टी की हैसियत बुलंद होने के बाद इनकी चमक बनी थी। कम उम्र के बाद भी आप ने इन्हें गुमनाम से विख्यात बनाया, इन्हें पहले विधायक बनाया फिर राज्य सभा का सदस्य बनाया, आप इससे ज्यादा क्या कर सकती थी? लेकिन गलती आप की भी है। अशोक मित्तल और राजिंदर गुप्ता जैसे बड़े व्यापारियों और उद्योग पतियों को अपना आइकॉन बनाया ही क्यों? राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे हवा हवाई और गैर संघर्षित, गैर सैद्धांतिक लोगों को राज्य सभा में भेजा ही क्यों? बोया पेड़ बबूल का तो आम कहा से होय? आप तो गरीबों की लड़ाई लड़ने के लिए बनी थी, भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए बनी थी।
भाजपा का दलबदलू अटल बिहारी वाजपेयी शास्त्र भी जानिए। एक बार मैने अटल बिहारी वाजपेयी से दलबदलू शास्त्र पूछ लिया था,रीढ़विहीन और चंद्रशेखर सरकार में कुचर्चित यशवंत सिन्हा, रामजन्म भूमि विरोधी जसवंत सिंह सहित बदनाम व्यापारियों, उद्योगपतियों और ठेकेदारों से बीजेपी के भर जाने पर चिंता जताई थी। इस पर अटल जी मुझसे ही प्रति प्रश्न किया था। उन्होंने कहा था कि आपने बाढ़ देखी है? मैने उत्तर दिया था कि गांव का आदमी हूँ फिर बाढ़ कैसे नहीं देखूंगा? फिर अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कहा था कि बाढ़ के पानी में सांप, बिच्छू, पेड़ पत्ती सब बहकर आते हैं, राजनीति में भाजपा की बाढ़ आई हुई है फिर ऐसी स्थितियां होंगी। वाजपेई जी का यह उत्तर सुनकर मैं दंग रह गया था। अटल जी के विशाल व्यक्तित्व के सामने उन्हें नैतिकता और शंुचिता का पाठ पढाने का साहस नहीं कर सका था। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के दौर से ही बीजेपी में यह बुराई चली आ रही है। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भाजपा पर यह बुराई सिर चढ़कर बोलने लगी है।
राम तेरी गंगा मैली हो गयी, पापियो के पाप धोते -धोते।  भाजपा पर राजनीतिक विश्वसनीयता और राजनीतिक सुचित का बड़ा संकट है। जब नदी में नाले का पानी गिरने लगता हैं तो नदी पवित्र नहीं रह पाती है, नदी स्वच्छ नहीं रह पाती है। इसी कारण गंगा भी कई जगहों पर स्नान करने लायक भी नहीं है। ठीक इसी प्रकार भाजपा भी अब स्वच्छ, सुचिता निष्ट नहीं रही, नैतिकशील नहीं रही, इनकी विश्वसनीयता भी प्रभावित हुई है। विपक्षी पार्टियां हिंदुत्व विरोधी है, मुस्लिम समर्थक राजनीति करती है, मुस्लिम जिहाद को सन्तुष्ट करती हैं। इसकी प्रतिक्रिया में हिंदुत्व की गोलबंदी होती हैं, मुस्लिम समर्थक राजनीति पर हिंदुत्व वोट का प्रहार होता है। परिणाम बीजेपी की जीत होती हैं, नरेंद्र मोदी इसी कारण सत्ता पर सवार हैं। लोभी, लालची, अनैतिक, भ्रष्ट, व्यापारी,उद्योगपति, ठेकेदार,अफसर और प्रोफेशनल किसी के सगा नहीं होते हैं, ये हमेशा सत्ता के साथ रहते हैं, जिसकी सत्ता होती है उसके पुत्र यानी समर्थक, सहचर बन जाते हैं। जिस दिन मोदी सरकार जाएगी उस दिन राघव चड्ढा, संदीप पाठक जैसे दलबलुओं के लिए भाजपा फिर से भ्रष्ट और सांप्रदायिक लगने लगेगी, भाजपा छोड़ने और भाजपा को गाली देने के लिए भगदड़ मचेगी। फिर भी भाजपा भ्रष्ट, बईमान, अनैतिक, लालची किस्म के लोगों को जगह देकर उनके भ्रष्टाचार और कुर्कृतियों को सुरक्षा और संरक्षण देने से पीछे नहीं हट रही है।
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’प्रेषक
’आचार्य श्रीहरि’
’नई दिल्ली’
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