मां बनने के बाद भी नहीं रुकी उड़ान: वायुसेना अधिकारी नेहा देवी ने दौड़ में रचे नए कीर्तिमान

मां बनने के बाद भी नहीं रुकी उड़ान: वायुसेना अधिकारी नेहा देवी ने दौड़ में रचे नए कीर्तिमान

नई दिल्ली/जम्मू:
भारतीय वायुसेना की अधिकारी, एथलीट और एक मां के रूप में अपनी पहचान बना चुकीं नेहा देवी आज युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण बन गई हैं। कठिन परिस्थितियों, मातृत्व और कड़ी ट्रेनिंग के संतुलन के बीच उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे यह साबित करती हैं कि दृढ़ संकल्प के सामने कोई बाधा बड़ी नहीं होती।

नेहा देवी ने जुलाई 2013 में एयर फोर्स अकादमी जॉइन की थी। उस समय उनका वजन निर्धारित मानक से लगभग 10 किलोग्राम अधिक था। लेकिन निरंतर मेहनत और अनुशासित प्रशिक्षण के दम पर उन्होंने एक वर्ष के भीतर खुद को पूरी तरह बदल दिया और जून 2014 में “फिटर, स्ट्रॉन्गर और शार्पर” बनकर कमीशन प्राप्त किया।

साल 2017 तक दौड़ और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग उनकी दिनचर्या और पहचान का हिस्सा बन चुकी थी। कोविड-19 महामारी के दौरान जब संगठित प्रशिक्षण रुक गया, तब भी उन्होंने घर पर वर्कआउट करके अपनी फिटनेस बनाए रखी।

साल 2021 में उन्होंने पहली बार एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन (वर्चुअल संस्करण) में भाग लिया और अपने आयु वर्ग में तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद भी वे लगातार कई प्रतियोगिताओं में शीर्ष धावकों में शामिल रहीं।

साल 2023 में उन्होंने स्टेशन क्रॉस-कंट्री (10 किमी) में ओवरऑल छठा स्थान हासिल किया और स्टेशन यूनिटी रन (21 किमी) में तीसरे स्थान पर रहीं। इन दोनों प्रतियोगिताओं में वे अकेली महिला प्रतिभागी थीं।

जनवरी 2024 में जब नेहा गर्भवती हुईं, तब उनके सामने एक नया लक्ष्य था। उन्हें यह महसूस हुआ कि कई महिलाएं सामाजिक संकोच या डर के कारण गर्भावस्था के दौरान व्यायाम या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से दूर रहती हैं। वे इस सोच को बदलना चाहती थीं।

डॉक्टरों की निगरानी में उन्होंने नियंत्रित रूप से वर्कआउट जारी रखा। चार महीने की गर्भावस्था में ही उन्होंने टीसीएस 10K (वर्चुअल) में दूसरा स्थान प्राप्त किया। सितंबर 2024 में उन्होंने सी-सेक्शन के जरिए एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया।

प्रसव के बाद का समय कठिन और दर्दभरा था—चलने से जॉगिंग और फिर जॉगिंग से दौड़ तक का सफर धीरे-धीरे तय करना पड़ा। लेकिन उनका लक्ष्य स्पष्ट था कि मातृत्व किसी महिला की क्षमता को सीमित नहीं करता।

अपनी बेटी को छह महीने तक पूर्ण स्तनपान कराने के साथ-साथ उन्होंने रोजाना 40 से 60 मिनट जिम या घर पर वर्कआउट के लिए समर्पित किए। रात में बच्चे की देखभाल, आधिकारिक जिम्मेदारियों और रिकवरी के बीच उन्होंने धैर्य के साथ खुद को फिर से तैयार किया।

सिर्फ 15 महीने के भीतर उन्होंने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। 2025 में वर्धा दिल्ली हाफ मैराथन में 1 घंटा 35 मिनट का समय, कश्मीर मैराथन 2025 में 1 घंटा 40 मिनट के साथ महिला वर्ग में अंतरराष्ट्रीय धावकों सहित ओवरऑल आठवां स्थान, अडानी मैराथन 2025 में फुल मैराथन (3 घंटे 42 मिनट) में रक्षा वर्ग में तीसरा स्थान और 100 किमी अल्ट्रा मैराथन 9 घंटे 52 मिनट में पूरा करने का कारनामा किया।

24 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 24 घंटे के स्टेडियम रन में उन्होंने 9 घंटे 52 मिनट में 100 किमी पूरा किया। हालांकि वे राष्ट्रीय क्वालिफिकेशन से मात्र 22 मिनट से चूक गईं।

इसके कुछ ही दिनों बाद 2 फरवरी 2026 को आयोजित इंडियन नेवी हाफ मैराथन में उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच पहला स्थान हासिल किया और महिला ओपन कैटेगरी में 1 घंटा 32 मिनट 50 सेकंड के समय के साथ चौथे स्थान पर रहीं। वे पोडियम से सिर्फ 43 सेकंड पीछे रह गईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय मानक से 22 मिनट पीछे रहना असफलता नहीं बल्कि एक संकेत है कि उचित वैज्ञानिक प्रशिक्षण और पेशेवर कोचिंग मिलने पर नेहा देवी जल्द ही तिरंगा पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकती हैं।

आज नेहा देवी सिर्फ एक वायुसेना अधिकारी या एथलीट ही नहीं, बल्कि जम्मू में युवाओं और महिलाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं। वे युवा लड़कियों को फिटनेस अपनाने, अपने सपनों पर विश्वास करने और सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

उनका संदेश स्पष्ट है—
“मातृत्व किसी महिला की क्षमता को सीमित नहीं करता, बल्कि उसे कई गुना बढ़ा देता है।”

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