शिलचर मेडिकल कॉलेज में मजदूर की मौत, बिल न चुकाने पर शव देने से इनकार; सामाजिक संगठनों के सहयोग से हुआ अंतिम संस्कार
विशेष प्रतिनिधि, शिलचर, 8 मार्च:
काछाड़ जिले के काशीपुर चाय बागान निवासी मजदूर सागर रविदास की शिलचर मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में कई दिनों तक इलाज के बाद शनिवार रात मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि आर्थिक तंगी के कारण अस्पताल का बिल चुकाने में असमर्थ होने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मृतक का शव परिवार को सौंपने से इनकार कर दिया।
परिवार के अनुसार मृतक के पास न तो Ayushman Bharat का कार्ड था और न ही राशन कार्ड, जिसके कारण उन्हें किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभ नहीं मिल सका। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए अस्पताल का बिल चुकाना संभव नहीं हो पा रहा था।
इस संबंध में हमारे प्रतिनिधि द्वारा Silchar Medical College and Hospital के प्रधानाचार्य डॉ. भास्कर गुप्ता से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि यदि मृतक के पास आयुष्मान कार्ड होता तो बिल की समस्या नहीं आती। उनके अनुसार नियम के अनुसार बिल चुकाने के बाद ही शव परिजनों को सौंपा जा सकता है।
इस बीच वरिष्ठ पत्रकार दिलीप कुमार ने सामाजिक स्तर पर सहायता के लिए प्रयास किया। इसके बाद Marwari Yuva Manch की शिलचर शाखा और पूर्व विधायक तथा श्रमिक नेता Rajdeep Goala आगे आए। उनके सहयोग से अस्पताल का बकाया बिल चुकाया गया, जिसके बाद मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया गया। बाद में परिवार शव को अपने गांव ले जाकर अंतिम संस्कार कर सका। इस पूरे मामले में गंगापुर के राम प्रसाद रविदास ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए परिवार की मदद की।
हालांकि सागर रविदास के परिवार को समय पर सहायता मिल गई, लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसे कई गरीब परिवार भी होते हैं जो अस्पताल का बिल चुकाने में सक्षम नहीं होते। ऐसी स्थिति में उनके साथ क्या होता है, यह एक गंभीर सामाजिक प्रश्न है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अस्पताल द्वारा केवल बिल न चुकाने के कारण शव रोकना मानवीय और कानूनी दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। भारत के संविधान के तहत Article 21 of the Constitution of India के अंतर्गत व्यक्ति की गरिमा की रक्षा को महत्वपूर्ण अधिकार माना गया है, जो मृत्यु के बाद भी लागू होता है।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण मामले Pt. Parmanand Katara v. Union of India से जुड़े सिद्धांतों में भी चिकित्सा व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि बताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी अस्पताल में बिल के कारण शव रोके जाने की घटना सामने आती है तो परिजन जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग अथवा National Human Rights Commission से शिकायत कर सकते हैं। प्रशासन के हस्तक्षेप से ऐसी समस्याओं का समाधान संभव है।