कछाड़ जिले के हरिनगर में अंधविश्वास का तांडव,

कछाड़ जिले के हरिनगर में अंधविश्वास का तांडव,
 डायन के संदेह में परिवार को घर से निकाला, 8 लोगों ने एक महीने जंगल में घास-फूस खाकर गुजारी रातें
चंद्रशेखर ग्वाला लखीपुर, 8 मार्च : राज्य में ‘असम डायन शिकार (निषेध, रोकथाम और संरक्षण) अधिनियम, 2015’ के लागू होने के बावजूद, कछार जिले के हरीनगर स्थित खसिया पुंजी में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जहाँ एक ही परिवार के 8 सदस्यों, जिनमें 4 महिलाएं भी शामिल हैं, को ‘डायन’ होने के संदेह में गांव से बाहर निकाल दिया गया। यह पीड़ित परिवार लगभग एक महीने तक पास के घने जंगलों में छिपकर रहने को मजबूर रहा।
पीड़ित बीजू खसिया द्वारा जयपुर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर (FIR) के अनुसार, घटना 10 फरवरी की है। आरोप है कि ब्रीफ खसिया, स्टेफन खसिया और अनियाओ खसिया के नेतृत्व में 10-15 हथियारबंद लोग उनके घर में घुस आए। उन्होंने बीजू की पत्नी, एम. सियांग खसिया पर ‘डायन की आत्मा’ होने का आरोप लगाया और गांव में होने वाली बीमारियों व दुर्भाग्य के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया।
आरोपियों ने धमकी दी कि यदि परिवार ने तुरंत घर खाली नहीं किया, तो उन्हें जिंदा जला दिया जाएगा। जान बचाने के लिए परिवार जंगल की ओर भाग गया। 10 फरवरी से 6 मार्च तक यह परिवार जंगली पौधों और कंद-मूल खाकर जीवित रहा। इस प्रताड़ना के कारण बीजू के दो बेटों की पढ़ाई भी बर्बाद हो गई, जो पीएम श्री इंद्रसिंह राजबंशी पब्लिक हाई स्कूल में कक्षा 9 के छात्र हैं और अपनी वार्षिक परीक्षा नहीं दे सके।
 लगभग एक महीने बाद, शनिवार (7 मार्च) को यह परिवार जॉयपुर पुलिस स्टेशन पहुँचा और न्याय की गुहार लगाई। वर्तमान में परिवार ने थाने में ही शरण ली है।
असम डायन शिकार अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को डायन बताना या उसका सामाजिक बहिष्कार करना एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। इसमें 3 से 7 साल तक की कैद और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। हिंसा की स्थिति में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। कछार पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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