महर्षि विद्या मंदिर में सरस्वती पूजा नहीं मनाए जाने से विद्यार्थियों में हताशा

महर्षि विद्या मंदिर में सरस्वती पूजा नहीं मनाए जाने से विद्यार्थियों में हताशा

शिलचर, 22 जनवरी: विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा के अवसर पर जहाँ पूरे देश के शैक्षणिक संस्थानों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला, वहीं महर्षि विद्या मंदिर शिलचर में सरस्वती पूजा का आयोजन न किए जाने से विद्यार्थियों में गहरी निराशा और हताशा देखी गई।

सरस्वती पूजा छात्रों के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ज्ञान, साधना और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मानी जाती है। विद्यालय परिसर में हर वर्ष इस दिन विशेष उत्साह रहता था, लेकिन इस बार पूजा न होने से छात्रों की भावनाएँ आहत हुई हैं। कई विद्यार्थियों ने बताया कि वे लंबे समय से इस दिन का इंतज़ार करते हैं और माँ सरस्वती से अपने अध्ययन एवं भविष्य के लिए आशीर्वाद की कामना करते हैं।

कुछ छात्रों का कहना है कि विद्यालय शिक्षा का केंद्र होने के साथ-साथ संस्कारी और सांस्कृतिक मूल्यों को सिखाने का स्थान भी होता है। ऐसे में सरस्वती पूजा जैसे आयोजन न होना उन्हें मानसिक रूप से निराश करता है। अभिभावकों के एक वर्ग ने भी इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में अनुशासन, आस्था और भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित होता है।

हालाँकि विद्यालय प्रशासन की ओर से इस विषय में कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों में इस निर्णय को लेकर असंतोष बना हुआ है। कई लोगों ने मांग की है कि भविष्य में इस तरह के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों को पुनः विद्यालय में स्थान दिया जाए।

कुल मिलाकर, महर्षि विद्या मंदिर में सरस्वती पूजा का आयोजन न होना केवल एक कार्यक्रम का अभाव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की भावनाओं और परंपराओं से जुड़े विश्वास को भी प्रभावित करता दिखाई दे रहा है।

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