एनआईटी शिलचर में ‘खामोश अधिकारी’ की चर्चा, मुस्कान और संवादहीनता से स्टाफ असहज

शिव कुमार शिलचर 14 फरवरी: कार्यस्थल पर सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना केवल कुशल प्रबंधन की निशानी नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और सकारात्मक कार्य संस्कृति का भी प्रमाण होता है। लेकिन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) शिलचर में एक उच्चस्तरीय अधिकारी अपने व्यवहार के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं। कारण है—उनकी गंभीर मुद्रा, संवादहीनता और पूरी तरह से हावभाव रहित व्यक्तित्व, जिसने संस्थान के कर्मचारियों, सिक्योरिटी गार्ड और प्रोफेसरों के बीच असहजता पैदा कर दी है। संस्थान के कई कर्मचारी और स्टाफ सदस्य इस बात से निराश हैं कि जब वे इस अधिकारी को नमस्ते या गुड मॉर्निंग कहते हैं, तो उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती। उनकी चुप्पी और रूखे व्यवहार के कारण माहौल में एक प्रकार की औपचारिक दूरी बन गई है।
संस्थान के एक सिक्योरिटी गार्ड ने कहा, हमारा काम सभी आगंतुकों और अधिकारियों का सत्कार करना है। जब हम किसी को नमस्ते या गुड मॉर्निंग कहते हैं, तो स्वाभाविक रूप से उम्मीद होती है कि सामने से भी जवाब मिलेगा। लेकिन ये अधिकारी तो मानो सुनते ही नहीं। कई बार लगता है जैसे हमारी उपस्थिति ही उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।कार्यालय में कार्यरत एक वरिष्ठ कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, हमने अब तक कई अधिकारियों के साथ काम किया है, लेकिन ऐसा व्यक्तित्व पहली बार देखा है। आमतौर पर वरिष्ठ अधिकारी थोड़ा अपनापन दिखाते हैं, जिससे कर्मचारियों को भी काम करने में सहजता महसूस होती है। परंतु इनसे किसी प्रकार की आत्मीयता या संवाद की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती।
संस्थान के एक प्रोफेसर ने टिप्पणी करते हुए कहा, एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रोफेसरों और अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन जब कोई अधिकारी अपने चारों ओर संवादहीनता की दीवार खड़ी कर ले, तो यह माहौल को नकारात्मक बना सकता है।
क्या यह केवल स्वभाव है या पद की गंभीरता?
कुछ लोग मानते हैं कि यह अधिकारी का स्वभाव हो सकता है, जबकि कुछ इसे उनके पद की गंभीरता के रूप में देखते हैं। हालांकि, यह भी सच है कि किसी भी संस्थान में नेतृत्व केवल अनुशासन और नियमों से नहीं चलता, बल्कि एक सकारात्मक दृष्टिकोण और सौहार्दपूर्ण व्यवहार भी सफलता की कुंजी होता है।
संस्थान के कई कर्मचारी और स्टाफ उम्मीद कर रहे हैं कि कार्यस्थल पर संवाद और सकारात्मकता को बढ़ावा देने की जरूरत को अधिकारी समझेंगे। क्योंकि मुस्कान और आत्मीयता न केवल मनोबल बढ़ाती है, बल्कि कार्यस्थल को अधिक समावेशी और प्रेरणादायक भी बनाती है।

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