राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी
कुलपति, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा
उपनिषदों में वर्णित है – ‘माता भूमि पुत्रोऽहं पृथिव्या:’ अर्थात् भूमि माता है एवं हम उसके पुत्र हैं। मानव हृदय में इस सूत्र का अनुभव होने पर राष्ट्रीयता की भावना बलवती होती है एवं राष्ट्र निर्माण के अंकुर प्रस्फुटित होते हैं। राष्ट्र रूपी संगठन को सम्यक रूप से चलाने हेतु दूरदर्शी नेतृत्व अर्थात् दूरदृष्टि की आवश्यकता पड़ती है। यह दूरदृष्टि सम्यक एवं सतत विकास के मार्ग पर अग्रसर होने को प्रेरित करती है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इसी दृष्टिसंपन्नता के साथ देश का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने से पूर्व उन्होंने देशवासियों से आह्वान कर भारत को सर्वश्रेष्ठ देश बनाने हेतु उनका समर्थन माँगा था। जनमानस ने उनके हृदय के उद्गार पर विश्वास जताया एवं उन्हें दो बार देश के नेतृत्व का महनीय दायित्व सौंपा।
वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री जैसे महत्तर दायित्व को संभालते ही उन्होंने चुनावी वादों पर अमल करना प्रारंभ किया। नेता की पहचान उसके निर्णय से होते हैं। प्रधानमंत्री ने सर्वप्रथम 15 अगस्त, 2014 को लाल किले की प्राचीर से देश को स्वच्छ बनाने का राष्ट्रव्यापी अभियान श्रमदान की अपील करके छेड़ा। देश की बहुत बड़ी आर्थिक संपदा केवल गंदगी की भेंट चढ़ जाती है एवं इससे देश की वैश्विक छवि पर भी बट्टा लगता है। उन्होंने ‘हर घर शौचालय ‘ का अभियान भी छेड़ा। इस अभियानो से देश स्वच्छ एवं सुंदर बना और विदेशी आकर्षण एवं निवेश भी बढ़ा।
समस्याओं के समाधान की कितनी गहरी समझ प्रधानमंत्री को है इसके कई उदाहरण हमारे समक्ष हैं। आज़ादी के 70 वर्षों बाद भी देश की बड़ी जनसंख्या का अपना बैंक खाता न होने से सरकारी योजनाओं के अभीष्ट लाभ उन्हें नहीं मिल पाते थे। प्रधानमंत्री ने ‘जन-धन योजना’ के जरिए बैंकिंग सेवाओं को गरीबों तक पहुंचाकर समानता को बढ़ावा दिया। ‘आयुष्मान भारत योजना’ के माध्यम से उन्होंने असहाय लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं सुगम करायीं। वहीं छोटे व्यवसायों एवं रोजगार को सहायता प्रदान करने हेतु ‘मुद्रा योजना’ की शुरुआत की, जिससे व्यवसाय बढ़ा। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत गरीब लोगों को अच्छे एवं सस्ते आवास भी उपलब्ध हुए। ‘उज्ज्वला योजना’ के अंतर्गत देश भर में गैस सिलेंडर के नए कनेक्शन दिए गये। फलतः मातृशक्ति धुएँभरी रसोई से मुक्त हुईं।
स्वतंत्रता पूर्व ही स्पष्ट हो गया था कि हमारा बहुत सारा धन विदेशी वस्तुओं की खरीद-फरोक्त में विदेश चला जाता है। आधुनिक हिंदी के निर्माता भारतेंदु हरिश्चंद्र ने इसे बड़ी समस्या के रूप में चिन्हित करते हुए कहा था, ‘पै धन विदेश चलिजात इहै अति ख्वारी।’ आज़ादी के बाद भारत अपनी वस्तु स्वयं बनाने की बात को जन-आंदोलन नहीं बना पाया। गांधी जी के स्वदेशी स्वप्न को पूरा करने का बीड़ा भी प्रधानमंत्री ने ही ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के द्वारा उठाया। यह अभियान भारतीय अर्थव्यवस्था को स्वावलंबी, स्वदेशी एवं टिकाऊ बनाने का सार्थक प्रयास है। इसमें स्वदेशी उत्पादन, निवेश एवं स्वरोजगार को प्राथमिकता मिली। इसको तीव्रगति देने हेतु ‘मेक इन इंडिया’ के द्वारा भारत को ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ में बदलने के प्रयास हो रहे हैं। परिणामस्वरूप भारत पर दुनिया का विश्वास मजबूत हुआ एवं विश्व की बड़ी कम्पनियां अपने कारखाने भारत में खोल रही हैं। नोटबंदी जैसा साहसी कदम उठाकर उन्होंने कालेधन पर कड़ी चोट पहुंचाई एवं भ्रष्टाचार कम किया।
जीवन के हर क्षेत्र में टेक्नोलॉजी ने अपने पैर जमाएं हैं। ऐसे में भारत कैसे पीछे रह सकता था। ‘डिजिटल इंडिया’ प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता का मूर्त रूप है। इसके तहत देश ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, डिजिटल वित्तीय सेवाएँ एवं ई-गवर्नेंस द्वारा आगे बढ़ रहा है। वैश्विक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु हम तकनीक एवं प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में भारी निवेश कर रहे हैं। ‘जीएसटी’ द्वारा भारत में सामान्य वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान से कर संरचना सुगम हुयी।
कोविड-19 जैसी भयंकर महामारी से जब दुनिया में तबाही मची तब प्रधानमंत्री मोदी ने विविध रचनात्मक प्रयोगों से जनता का हौसला बढ़ाया। सरकार ने आपातकालीन मदद द्वारा 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन की गारंटी दी। गरीब लोगों के खाते में सरकार ने जीवन-यापन हेतु पैसे भेजे एवं सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण पूर्णरूपेण निःशुल्क रहा। यही नहीं भारत ने कई देशों को कोविड वैक्सीन दिलाकर ‘सर्वे भवन्तु निरामया ‘ को साकार किया।
हमारे देश में वर्षों से लंबित दो समस्याओं का निपटारा भी मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति का सूचक है। आस्था से जुड़े राम मंदिर के निर्माण का कार्य अंतिम चरण में है तो वहीं जम्मू कश्मीर के भीतर भारत से अलगाव की भावना को बढ़ाने वाली धारा 370 अब निष्प्रभावी हो चुकी है। वहाँ अमन-चैन बना हुआ है। सैलानियों की वापसी से व्यापार-रोजगार में भी वृद्धि हो रही है। बहुप्रतीक्षित ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ को नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों की मुकुटमणि कहना अतिश्योक्ति न होगी। इस नीति में भारत का भविष्य बदलने की क्षमता है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु यह नीति निश्चय ही कारगर साबित होगी। सर्वसमावेशी, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा नीति द्वारा सशक्त युवाओं का भारत बनाने का यह अभिनव प्रयास है।
‘इंडिया फर्स्ट’ एवं ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे संकल्प राष्ट्र के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता के मानक है। आतंकवाद के विरुद्ध सर्जिकल स्ट्राइक जैसे निर्णयों से उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा से समझौता न करने का संदेश दिया। कार्यक्षेत्र में प्रतिबद्धता, सांस्कृतिक दृष्टिकोण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नेतृत्व क्षमता, पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी स्पष्ट दृष्टि एवं जी-20 के ध्येय वाक्य ‘एक धरती, एक परिवार और एक भविष्य’ के द्वारा प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता हासिल की एवं उनकी छवि एक वैश्विक नेता की बनी है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति का ध्वज लहराया है। आज उनकी लोकप्रियता नए मानक गढ़ रही है।
सौर ऊर्जा का निर्माण, प्लास्टिक बैन, हरित भारत एवं नमामि गंगे जैसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण के प्रति मोदी सरकार की गम्भीरता के सूचक हैं। उनके कार्यकाल में बनारस में काशी कॉरिडोर, उज्जैन में महाकाल लोक बनकर तैयार हुआ है। कामाख्या कॉरिडोर एवं विंध्याचल कॉरिडोर आदि पर तीव्र गति से काम हो रहा है। अनेक सांस्कृतिक केंद्रों के जीर्णोद्धार का महनीय कार्य भी विगत नौ वर्ष की उपलब्धि है। उन्होंने अपनी भाषा, पहनावे, खान-पान एवं आस्था से समझौता नहीं किया एवं अपनी हिंदू छवि पर सदैव गर्व किया क्योंकि हिंदू होना उन्हें किसी का विरोधी नहीं बनाता। देश की एकता-अखंडता को अक्षुण्ण रखने, जन-जन में विश्वास एवं भाईचारे की भावना को सुदृढ़ करने एवं देश को प्रगतिशील बनाने हेतु उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास एवं सबका प्रयास’ का नारा दिया । उन्होंने अगले 25 वर्षों को देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना एवं इस ‘अमृत काल’ में विकसित भारत, गुलामी की हर सोच से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता एवं एकजुटता व नागरिकों द्वारा अपने कर्तव्य पालन के ‘पंच प्रण’ का आह्वान किया। देश नयी राह, नए संकल्प एवं नए सामर्थ्य समेत उनके नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत बनने को संकल्पित है।
आज वैश्विक व्यापार में हमारी हिस्सेदारी असरकारक है।शीघ्र हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। ‘मेक इन इंडिया ‘ के अंतर्गत हम रक्षा उपकरण स्वयं निर्मित कर रहे हैं। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लोहा मनवाते हुए विश्व में सर्वप्रथम हमने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचे। मंगल एवं सूर्य की दिशा में भी हमारे अंतरिक्ष अभियान ने कदम बढ़ाएं हैं। लक्ष्य है कि आज़ादी के सौ वर्ष पूर्ण होने पर हम दुनिया में अपना खोया गौरव प्राप्त करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि हम जाति, पंथ, भाषा, लिंग एवं क्षेत्रीयता आदि की संकुचित सीमाओं से ऊपर उठकर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लिए प्रतिबद्ध हों। देश का नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि प्रधानमंत्री के ‘आत्म निर्भर भारत’ विजन में अपनी-अपनी आहुति देवें। हमें प्रधानमंत्री मोदी के शतायु होने की मंगलकामना करनी चाहिए।