आरिफ मोहम्मद ख़ान (माननीय राज्यपाल केरल) मुख्य अतिथि के रूप पधारे थे । अपने उद्बोधन में इन्होंने कहा कि पुरातन धर्म और दर्शन से जुड़ी है हिंदी भाषा । राज्यपाल जी ने अपने कुछ संस्मरण साझा किया और बताया कि उन्हें पहली केन्द्रीय हिंदी समिति का सदस्य कमलापति त्रिपाठी के साथ बनाया गया था, जो मेरे लिए सौभाग्य की बात थी। उन्होंने सभी से अपील किया कि हिंदी के प्रोत्साहन एवम् संवर्धन में सहयोग करें । संविधान में उल्लिखित हिंदी के धाराओं का का भी उल्लेख किया। श्री आरिफ़ मुहम्मद ख़ान ने आगे कहा कि आने वाले नस्लो के सपनो को पूरा करने के लिए हर भाषाओं को विकास करने का पूर्ण अवसर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक भाषा होगी वह हिंदी होगी। एक भाषा की उद्देश्य की पूर्ति के लिए केन्द्रीय हिंदी संस्था बनाई गई है । विभिन्न राज्यों में बोले जानी बाली भाषाओं का साहित्य सम्मृद्ध है , परंतु एक भाषा को सम्पर्क भाषा के रूप में विकसित किया जा सके वह हमारी राज भाषा हिंदी ही हो सकती है। सन १९५० ई से अब तक हिंदी का काफी विकास हो चुका है। इसके विकास में हिंदी लेखकों का विशेष योगदान है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसका प्रयोग बढ़ा है। संघ की राजभाषा हिंदी वास्तविक संवाद का माध्यम बने। इन्होंने राज भाषा विभाग की तारीफ़ की। प्राचीन संस्कृति का संरक्षण भाषाओं के वजह से हो पाई है। हमे अधिक से अधिक भाषाओं को सीखना चाहिए । सबको मिल कर प्रयास करने से हिंदी राजभाषा से ऊपर उठकर राष्ट्र भाषा बन सकती है।
प्रसिद्ध विद्वान चमू कृष्ण शास्त्री (अध्यक्ष केन्द्रीय भासा संस्थान) ने अपने उद्बोधन में बताया कि अपने व्यवहार के सभी माध्यम में हिंदी आवश्यक है। इन्होंने आगे कहा कि जब तक लोगों के मानसिकता नही बदलेगी तब तक सरकारों के प्रयास विफल ही होगा । हमे संकीर्ण मानसिकता से आगे निकलना होगा, हमें शिक्षा एवम् व्यवहार में संपूर्ण भारत की उन्नति होना चाहिए तथा सभी भारतीय भाषाओं को सीख कर ही राज भाषा का आलिंगन किया जा सकता है। हमे सभी भाषाओं पर अभिमान है। हिंदी में नए शब्द निर्माण करना होगा, यह हम सबका दायित्व है। हिंदी भाषा को वर्तमान ज्ञान की भाषा बनाना चाहिए न केवल राज कार्य की भाषा। हिंदी ज्ञान की गंगा है इसके मध्यम भारत को विश्वगुरू बनायेंगे।

श्री एम नागराज निदेशक (कार्पोरेट प्लानिंग) हडको ने कहा सभी हिंदी में बात करें ।
डॉ शुचिस्मिता पलाई (मुख्य आयकर, आयुक्त गाजियाबाद) प्रति महिने हो नराकास की गतिविधि, हिंदी के लिए कुछ करें, हिंदी को आगे बढ़ाने की दायित्व सभी नराकास का है।
सुश्री जहाजेब अख्तर (मुख्य आयकर आयुक्त, अमृतसर) ने कहा कि हिंदी में यूनिवर्सल भाषा बनने की क्षमता है और भाषा को प्राकृति से जोड़ना होगा तथा जागरुकता के वजह से हमारे ख्वाब वाली हिंदी होगी।
अजय कुमार श्रीवास्तव (प्रबंध निदेशक ओवरसीज बैंक) ने कहा कि नराकास अपने लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु सफल प्रयास कर रहा है। राज भाषा सचिव भी नराकास के बैठक में सम्मलित होते है, यह हिंदी के प्रति सम्मान की बात है। हमको अपनी भाषा एवम् देश पर गर्व होना चाहिए।

विभिन्न नाराकस कार्यालय को पुरस्कार दिया गया। सम्मेलन में देश भर के अलग – अलग नाराकासो के कार्यालयों से लगभग १०००० सदस्य उपस्थित थे। शिलचर नराकास से डाo सुरेन्द्र नाथ उपाध्याय, पृथ्वी राज ग्वाला, सन्तोष ग्वाला, अनूप कुमार वर्मा (असम विश्वविद्यालय) डाo सौरभ वर्मा एवम् श्री राजीव कोहार (एनआईटी शिलचर), विकाश कुमार उपाध्याय (जवाहर नवोदय विद्यालय कछार) अखिल भारतीय राज भाषा सम्मेलन २०२३ में सम्मिलित हुए ।