28 में 8 सीटों पर ईसाई आदिवासियों का कब्जा, IRS निशा उरांव ने कहा- 4.3 फीसदी आबादी के पास 29 प्रतिशत ST सीटें

Reserved Tribal Seat-देशभर में जबरन धर्मांतरण की कोशिश पर लगाम लगाने के लिए झारखंड समेत कई राज्यों के आवाज उठ रही है। इस बीच आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने बताया कि झारखंड में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 28 सीटों में से 8 सीटों पर ईसाई आदिवासियों का कब्जा है।

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28 में 8 सीटों पर ईसाई आदिवासियों का कब्जा(फोटो- नवभारतटाइम्स.कॉम)
रांचीः झारखंड में आदिवासियों (अनुसूचित जनजाति) के लिए 81 में से 28 सीटें आरक्षित है, लेकिन ईसाई आदिवासियों की आबादी कम रहने के बावजूद उनका अधिक सीटों पर कब्जा है।

भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की अधिकारी निशा उरांव  से सोशल मीडिया फेसबुक पर पोस्ट में बताया कि राज्य में आदिवासियों के लिए 28 सीटों में से 8 सीटों पर ईसाई आदिवासियों को जीत मिली है। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 4.3 प्रतिशत ईसाई आदिवासियों के पास 29 प्रतिशत आदिवासी सीटें हैं। निशा उरांव ने कहा कि परिसीमन के मुद्दे पर आदिवासियों के लिए आरक्षित सीट घटने की चिंता सबको है, लेकिन सरना प्रतिनिधित्व के घटने की चिंता किसी को नहीं है।

आरएसएस की ओर से मंच पर बोलने की आजादी दी गई

निशा उरांव ने कहा कि उन्हें आरएसएस की ओर से अपने मंच पर बोलने की आजादी दी गई और सरना समाज के अहम मुद्दों पर वैचारिक समर्थन भी दिया गया। निशा उरांव ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं पाया की कोई खास विचारधारा उनपर थोपने का प्रयास किया गया। वो जैसी हैं, वैसे स्वीकार किया गया।

किसी भी मिशनरी संस्थान की ओर से कभी बुलाया नहीं गया

दूसरी तरफ निशा उरांव को किसी भी मिशनरी संस्थान की ओर से न किसी सामाजिक मंच पर बुलाया गया और न ही बोलने की आजादी दी गई। निशा उरांव ने कहा कि वो 2014 से रांची में पदस्थापित हैं। समाज के मुद्दों और अधिकारों की बातों पर चर्चा और काम करने के लिए अवसर की तलाश है।

सरना आदिवासियों का अधिकार कैसे सुरक्षित बचेगा?

निशा उरांव ने कहा कि आज मुख्य मुद्दा है कि आदिवासी पहचान को किससे खतरा है? अवैध धर्मांतरण पर रोकथाम कैसे लगे? सरना आदिवासियों को डीलिस्टिंग से लाभ कैसे मिलेगा?आदिवासियों को लिए आरक्षण का अधिकार कैसे सुरक्षित रहेगा? आदिवासियों की जमीन कैसे सुरक्षित रहेगी? सरना युवाओं को नौकरी और सरना आदिवासी का राजनीति में प्रतिनिधित्व क्या है?आख़िर इन मुद्दों पर बात करने की आजादी क्यों नहीं है? इन विषयों पर चर्चा होना चाहिए।

परिसीमन के बावजूद अधिकार सुरक्षित रखना संभव

आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने कहा कि यदि परिसीमन से आदिवासी आरक्षित सीटें घटती भी हैं तो भी राजनीतिक पार्टी सामान्य सीटों से आदिवासी उम्मीदवार को टिकट दे सकता है और वे जीत भी सकते हैं। राज्य में 2 सफल उदाहरण है। प्रतिनिधित्व भी बरकरार रहेगा।

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