“शब्दाक्षर कानपुर का, काव्य-अनुष्ठान सम्पन्न”
मुरली कबीर की पंक्ति ‘सूरज है खफा मुझसे, ये बात निराली है, उसके दामन से बस, कुछ धूप चुरा ली है। और अजय मदहोश का शे़र ‘करना पड़ा है ख़ुद से हमें ख़ुद को दर किनार, तब जा के मुश्किलों से शिवाले हुए हैं हम। ने सभा किया गुलजार। रविवार की संध्या राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था … Read more