प्रेरणा ब्यूरो हाइलाकांदी, 30 जुलाई: कछार जिले के भराखाई चाय बागान में 11 वर्षीय आदिवासी बालिका की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका की पहचान अर्चना उरांव के रूप में हुई है। उसके पिता प्रणव उरांव चाय बागान में श्रमिक हैं। आरोप है कि घटना के बाद पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया और पुलिस को समय पर सूचना नहीं दी गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अर्चना का शव चाय बागान के मालिक के बंगले में फंदे से लटका मिला। आरोप है कि शव को पुलिस के पहुंचने से पहले ही नीचे उतार लिया गया तथा बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए अंतिम संस्कार की तैयारी भी शुरू कर दी गई थी। इस बीच बराक चाय श्रमिक यूनियन के महासचिव एवं उधारबंद के विधायक राजदीप गोयाला के हस्तक्षेप के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में आया और शव को पोस्टमार्टम के लिए शिलचर मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
धोआरबंद थाना के प्रभारी अधिकारी (ओसी) ने बताया कि बागान प्रबंधन की ओर से उन्हें सूचित किया गया था कि बालिका के शरीर में गर्माहट होने के कारण उसे पहले बड़ा जालेंगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उसे शिलचर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बाद में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित किया।
हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब शव फंदे से लटका मिला था तो पुलिस को सूचना दिए बिना उसे क्यों उतारा गया? यदि बालिका के जीवित होने की आशंका थी, तब भी घटना की तत्काल जानकारी पुलिस को देना आवश्यक था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मृतका के पिता को प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने में भी बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। समाचार लिखे जाने तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।
घटना को लेकर बड़ा जालेंगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि बालिका की मृत्यु हो चुकी थी तो उसे मृत घोषित करने के बजाय सीधे रेफर क्यों किया गया। वहीं यदि उसके जीवित होने की संभावना थी, तो उसके संबंध में स्पष्ट चिकित्सकीय राय क्यों नहीं दी गई।
भराखाई चाय बागान के प्रबंध निदेशक राजेश सूदाम द्वारा पुलिस को तत्काल सूचना नहीं देने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि यह आत्महत्या का मामला भी माना जाए, तब भी कानून के अनुसार पुलिस को सूचित करना आवश्यक था।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए, ताकि बालिका की मौत की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या साक्ष्य छिपाने का प्रयास हुआ है, तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।