एक सद्गृहस्थ युग पुरुष के रूप में श्री मौनी जी महाराज को सदा याद रखा जाएगा – डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय
सिवान, 21 जूलाई – परम पूज्य श्री श्री 1008 साकेतवासी श्री मौनी जी महाराज (बलिया वाले) की 41वीं साकेतवास पुण्यतिथि के पावन अवसर पर बिहार के सिवान जनपद के असाव क्षेत्र स्थित श्री राम जानकी मंदिर, श्रीनगर पिहुली में दो दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं एवं विद्वानों ने पूज्य गुरुदेव के दिव्य जीवन, उनके आध्यात्मिक संदेशों तथा श्रीसीताराम नाम संकीर्तन की महिमा का स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
महोत्सव का शुभारंभ 20 जुलाई 2026 को 24 घंटे के अखंड श्रीसीताराम युगल नाम संकीर्तन एवं अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ के साथ हुआ। संपूर्ण आयोजन के दौरान मंदिर परिसर निरंतर “सीताराम-सीताराम” के मंगलमय जयघोष से गुंजायमान रहा तथा श्रद्धालु अखंड भक्ति-रस में निमग्न रहे।
21 जुलाई को अखंड संकीर्तन की पूर्णाहुति के उपरांत सामूहिक सुंदरकांड पाठ एवं श्रीहनुमान चालीसा का सस्वर पाठ संपन्न हुआ। बिहार के सुप्रसिद्ध भजन-गायकों द्वारा प्रस्तुत भक्तिमय भजनों ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्ति-भाव से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर उपस्थित संतों एवं विद्वान महापुरुषों ने पूज्य मौनी बाबा के तप, त्याग, साधना एवं लोककल्याणकारी जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके अमर संदेश “नाम जप ही कल्याण का सर्वोत्तम साधन है”—की वर्तमान युग में प्रासंगिकता पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए।
आयोजन की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी Google Meet के माध्यम से देशभर के संतों एवं विद्वानों के ऑनलाइन विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. सुधाकर मिश्र (न्यासी, श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास, तथा अध्यक्ष, वेदान्त विभाग, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी) ने अपने प्रेरक उद्बोधन में पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक व्यक्तित्व, श्रीसीताराम नाम संकीर्तन की महिमा तथा वर्तमान समय में सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन एवं आध्यात्मिक मूल्यों के पुनर्जागरण की आवश्यकता पर विस्तृत विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का समापन भव्य महाप्रसाद (भंडारा) के साथ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेव के चित्रस्वरूप के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए आध्यात्मिक आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
इस पावन अवसर पर श्री राम जानकी मंदिर के महंत श्री 108 श्री राघव दास जी महाराज का विशेष सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। संपूर्ण आयोजन श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास, बलिया तथा बिहार प्रांत के समस्त शिष्यों एवं श्रद्धालु भक्तों के समर्पित सहयोग से भगवान की अहैतुकी कृपा द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव के ज्येष्ठ सुपुत्र एवं शिष्य ने अपने संबोधन में कहा कि पूज्य मौनी बाबा ने गृहस्थ जीवन का निर्वहन करते हुए हिमालय की कंदराओं में लगातार 12 वर्षों तक मौन साधना कर आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त की। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन श्रीसीताराम नाम संकीर्तन के प्रचार-प्रसार, भक्ति, सदाचार तथा आध्यात्मिक चेतना के जागरण हेतु समर्पित कर दिया। उनके द्वारा प्रारंभ की गई लगभग 76 वर्ष पुरानी बलिया की यह आध्यात्मिक परंपरा आज उत्तर प्रदेश, बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों में निरंतर जनमानस को धर्म, संस्कृति एवं आध्यात्मिक जीवन के प्रति प्रेरित कर रही है।
इस अवसर पर प्रखण्ड प्रमुख आन्दर सिवान बिहार श्रीमती राधा देवी ने बताया कि ऐसे अवसर हमारे जीवन में अनेक प्रकार से आनन्द प्रदान करने वाला है।
श्रद्धालुओं ने एक स्वर से पूज्य गुरुदेव के अमर संदेश को स्मरण करते हुए कहा कि “कलियुग में श्रीनाम ही एकमात्र सहारा है।”
इस अवसर पर श्री शिवजी पाण्डेय सोनू पाण्डेय मुखिया, बुक्कू पाण्डेय, राधेश्याम पाठक, बृजेन्द्र पाण्डेय, कुन्दन पाण्डेय, आदर्श तिवारी, राजा तिवारी, गुड़िया दुबे, पल्लवी पाण्डेय, पलक पाठक, नीरज उपाध्याय, सौरभ उपाध्याय, अनुग्रह उपाध्याय, अर्पित सिंह, उज्जवल मल्ल, सूर्यदेव पाण्डेय, रामपूजन पाण्डेय सहित हजारों श्रद्धालु, मातृशक्ति, युवा, संत एवं विद्वान जन उपस्थित रहे तथा पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका पुण्यस्मरण किया।
इस संपूर्ण आयोजन की आधिकारिक जानकारी डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय, मुख्य न्यासी, श्री श्री 1008 श्री मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास एवं गुरुकुल एवं मंदिर सेवा योजना प्रमुख, जम्मू-कश्मीर प्रांत द्वारा उपलब्ध कराई गई।