पासीघाट (अरुणाचल प्रदेश): अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले के मेबो उपखंड में सियांग नदी के तेज कटाव ने कई गांवों में कृषि भूमि और किसानों की आजीविका के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। बाढ़ के कारण नदी का कटाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर कृषि भूमि, नकदी फसलों और बांस के झुरमुटों को नुकसान पहुंचा है।
बोरगुली गांव में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई जा रही है। यहां मूल्यवान गीली धान की खेती वाली जमीन भी नदी के कटाव की चपेट में आ रही है। ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्थायी बाढ़ नियंत्रण और नदी कटावरोधी उपाय करने की मांग की है।
स्थानीय निवासी ओटिल तायेंग ने बताया कि नदी के बढ़ते कटाव के कारण वह करीब ८ एकड़ बांस का झुरमुट पहले ही गंवा चुके हैं। यह उनके परिवार की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत था। उन्होंने कहा कि उनकी कृषि भूमि ही परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा का मुख्य आधार है। कटाव इसी तरह जारी रहा तो बची हुई जमीन के भी कभी भी नदी में समा जाने का खतरा है।
ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में नदी का कटाव २०२१ से शुरू हुआ था और पिछले कुछ वर्षों में इसकी गति लगातार बढ़ती गई है। इससे नदी किनारे रहने वाले किसानों और अन्य ग्रामीणों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने मेबो के विधायक ओकेन तायेंग और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से मामले को प्राथमिकता के आधार पर उठाने की अपील की है। उन्होंने स्थायी तटबंध को मजबूत करने के साथ-साथ प्रभावी बाढ़ नियंत्रण और कटावरोधी उपाय जल्द शुरू करने की मांग की है, ताकि कृषि भूमि और संपत्ति को आगे होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।