सरस्वती विद्या मंदिर, बड़ा हाफलोंग में “सप्त शक्ति संगम 2025” का भव्य आयोजन — महिला सशक्तिकरण, संस्कृति और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम

हाफलोंग, डिमा हसाओ, 10 नवम्बर 2025:
सारस्वती विद्या मंदिर, बड़ा हाफलोंग के तत्वावधान में महिला सशक्तिकरण पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम “सप्त शक्ति संगम 2025” का आयोजन बड़े उत्साह और गरिमामय वातावरण में बरो हाफलोंग सांस्कृतिक भवन में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय नारी की आंतरिक शक्तियों, सांस्कृतिक गौरव और आत्मविश्वास का जीवंत उत्सव बन गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती नंदिता गोरलोसा (कैबिनेट मंत्री, असम सरकार – खेल एवं युवा कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण तथा विकास विभाग) उपस्थित थीं। विशिष्ट अतिथियों में श्रीमती माईफल केमप्राइश्रीमती श्यामली चक्रवर्तीश्रीमती अबोले जेमें और अन्य गणमान्य नागरिक शामिल हुए।

कार्यक्रम का संचालन मातृ भारती हाफलोंग की संयोजिका श्रीमती नितालिनी थाओसेन ने किया। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने भारतीय नारी की “सात शक्तियों” — श्रद्धा, बुद्धि, वाणी, शक्ति, धैर्य, सहनशीलता और साहस — के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर महिला के भीतर यह सात दिव्य शक्तियाँ निहित हैं, जिनकी जागरूकता ही सशक्त समाज का निर्माण कर सकती है।

मुख्य अतिथि श्रीमती नंदिता गोरलोसा ने अपने उद्बोधन में कहा कि “आत्मविश्वास और शिक्षा आज के युवाओं की सबसे बड़ी पूंजी है। लड़के और लड़कियाँ दोनों को ही समान अवसर और पारस्परिक सम्मान के साथ आगे बढ़ना चाहिए।” उन्होंने विद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में जागरूकता और समानता का संदेश देते हैं।

डीआईईटी की प्रवक्ता श्रीमती माईफल केमप्राइ ने अपने जीवन के प्रेरक अनुभव साझा किए और महिलाओं को साहसपूर्वक आगे बढ़ने का संदेश दिया। वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती श्यामली चक्रवर्ती ने कहा कि समाज के निर्माण और संस्कृति के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका अनुपम रही है।

कार्यक्रम के दौरान समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रेरणादायक महिलाओं को सम्मानित किया गया। इनमें दिबराई वीमेंस कमिटी तथा स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन में योगदान देने वाली महिलाएँ शामिल थीं। पाँच विशिष्ट महिलाओं को — जो गृहिणी होते हुए भी आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से सक्रिय और प्रेरणास्रोत हैं — “शक्तिशाली नारी सम्मान” से अलंकृत किया गया।

विद्यालय के विद्यार्थियों ने रानी लक्ष्मीबाई, रानी गैदिनल्यू, जया थाओसेन जैसी वीरांगनाओं के जीवन पर आधारित गीत, नृत्य, नाटक और भाषण प्रस्तुत किए। बच्चों द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन की महिला वीरांगनाओं का रूप धारण कर उनके अमृत वचनों का वाचन अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा।

कार्यक्रम में मातृ मंडली द्वारा “पंच परिवर्तन” विषय पर आकर्षक प्रस्तुति दी गई, जिसमें समाज में बदलाव लाने के लिए नारी की भूमिका पर प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही सुमधुर संगीत और देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया।

प्रदर्शित झांकी (टेबलो) ने दर्शकों में गर्व और भावनाओं की लहर दौड़ा दी। पूरा समारोह भारतीय संस्कृति, मातृशक्ति और राष्ट्रभक्ति की अद्भुत झलक से परिपूर्ण रहा।

अंत में, अतिथियों ने विद्यालय परिवार की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन निश्चित रूप से विद्यालय की उन्नति और समाज में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त कदम है।

विद्यालय के प्राचार्य एवं आचार्य परिवार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
सारस्वती विद्या मंदिर, बड़ा हाफलोंग द्वारा आयोजित “सप्त शक्ति संगम 2025” ने यह संदेश दिया कि —

“नारी केवल शक्ति नहीं, सृजन, संवेदना और संस्कृति की आधारशिला है।”

Leave a Comment