अक्सर सुनने को मिलता है कि समाज बदल गया है मेरे ख्याल से समाज बदलता नही है बल्कि समाज मे परिवर्तन आता है। परिवर्तन लाजमी और प्रकृति का नियम भी है परन्तु धन और बल के आधार पर परिवर्तन घातक है। प्रख्यात हिन्दी के साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद जी का कथन है कि यदि धन और बल सम्मान का आधार बन जाए तो समाज से सत्य, न्याय, करूणा धीरे धीरे लुप्त हो जाती है। आज समाज मे धन,बल का ही बोलबाला है। आज गरीब और कमजोर वर्ग को उसके हक तथा अधिकार से वंचित कराने पर राजी करवाने वाले फैसले ही कमोबेश देखने को मिलता है। इस नाते समाज मे पंचायत की भूमिका सशक्त होनी चाहिए ताकि कमजोर वर्ग को उसके हक तथा अधिकार मिलने के साथ- साथ हर समस्या का निदान न्यायपूर्वक मिल सके। समाज मे सभी को समान अधिकार मिले और आपस मे समरसता बना रहे इसके लिए समाज के प्रबुद्ध तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं व समाज बंधुओं द्वारा प्रति महिने एक आपसी बैठक होनी चाहिये जहां सामाजिक, धार्मिक तथा समसामयिक मुद्दे पर बातें होनी चाहिए यदि कोई समस्या हो तो उसके निदान पर चर्चा होनी चाहिए।
पवन कुमार शर्मा (शिक्षक)
दुमदुमा (असम)
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