समाजिक कुरीति, बेमेल विवाह और गरीबी की मार्मिक कहानी है ‘कहानी का प्लॉट’

अनिल मिश्र/पटना 

आचार्य शिव पूजन सहाय द्वारा रचित प्रसिद्ध कहानी ‘कहानी का प्लॉट’ आंचलिक, अमीरी- गरीबी, रूढ़िवादिता तथा दहेज प्रथा की हृदयविदारक कहानी है। यह उपरोक्त बातें साहित्य से गहरा लगाव रखने वाले कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राम प्रसाद सिन्हा ने कही। दरअसल बिहार प्रदेश के गया जिला अंतर्गत टिकारी नगर के हैप्पी किड्स विद्यालय  में आयोजित ‘कहानी विद कॉफी’ कार्यक्रम की 24 वीं कड़ी में कहानी ‘कहानी का प्लॉट ’ के पाठ एवं चर्चा के दौरान वक्ताओं ने समाज से जुड़े कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जिनका उल्लेख आचार्य शिवपूजन सहाय ने इस कहानी में की है। कार्यक्रम की शुरुआत शिक्षक पवन कुमार सिंह के द्वारा कहानी पाठ से हुई। कहानी में मुंशीजी अपने बड़े भाई दरोगा जी के जीवन काल में  ऐशों- आराम का जीवन जी रहे थे, लेकिन बड़े भाई के निधन के उपरांत गरीबी के दलदल में आ जाते हैं। मुंशीजी की बेटी भगजोगनी अत्यंत सुंदर होते हुए भी गरीबी के कारण अभावपूर्ण जीवन जीती है। मुंशीजी अपनी दरिद्रता की वजह से उसका विवाह योग्य युवक से नहीं कर पाते और अंततः उसका विवाह एक अधेड़ व्यक्ति से कर देते हैं। विवाह के कुछ समय बाद ही पति की मृत्यु हो जाती है। आगे चलकर भगजोगनी की शादी  उसके सौतेले बेटे से हो जाता है। रामेश्वर उच्च विद्यालय बेलागंज के प्राचार्य अबरार आलम ने कहा कि यह कहानी हमें भविष्य के प्रति सावधान करता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की अगली कड़ी उनके विद्यालय में आयोजित की जाएगी।इस बीच पत्रकार नारायण मिश्रा ने कहा कि 1928 में लिखी गई यह कहानी उस दौर के समाज का आईना है। जबकि टिकारी नगर के लोकप्रिय शिक्षाविद् प्रो. राजन ने विस्तार से कहानी को  समझाया और बताया कि यह एक कलजयी रचना है। सौ वर्षों के उपरांत भी कहानी का हर पहलू आज भी समाज में विद्यमान है। इस कहानी में लेखक ने दर्जनों कहानी का प्लॉट समाहित किया है, इसलिए इसे ‘ कहानी का प्लॉट’ नाम दिया गया।सेवानिवृत प्राचार्य शिव शंकर शर्मा ने कहा कि यह आंचलिक कहानी समाजिक कुरीतियों को उजागर करता है। उन्होंने कार्यक्रम के दो वर्ष पूरे होने पर आयोजक संजय अथर्व को बधाई दिया।इस बीच टिकारी नगर के चर्चित उद्योगपति सुरेश सिंह ने कहा कि मेरे विचार से इस कहानी का शीर्षक भगजोगनी होना चाहिए था। आयोजक और कार्यक्रम का संचालन कर रहे संजय अथर्व ने कहा कि इस आयोजन का उद्वेश्य साहित्य से बच्चों को जोड़ना है।इस कार्यक्रम में कई श्रोता ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े और अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की। कार्यक्रम का संचालन संजय अथर्व और धन्यवाद ज्ञापन  बी पी एन ग्लोबल स्कूल के निदेशक नामित राजा ने की।

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