संस्कृत दिवस पर शिविर, संगोष्ठी, विज्ञान प्रदर्शनी और गीत प्रतियोगिताओं का आयोजन
अपने संवाददाता, शिलचर :
संस्कृत दिवस को महज औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए नई पीढ़ी तक संस्कृत भाषा की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से संस्कृत भारती की ओर से शिलचर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। असम विश्वविद्यालय से लेकर शिलचर कॉलेज, संस्कृत भारती के प्रांत कार्यालय, विभिन्न विद्यालयों और संस्कृत बाल केंद्रों तक शिविर, चर्चा-सत्र, विज्ञान प्रदर्शनी, गीत प्रतियोगिता सहित कई प्रतियोगितात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में शिक्षाविदों एवं विशिष्ट अतिथियों ने संस्कृत भाषा की समृद्ध परंपरा, उपयोगिता और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए।
संस्कृत भारती के तत्वावधान में असम विश्वविद्यालय में दस दिवसीय संस्कृत शिविर आयोजित किया गया। गत 27 अगस्त को शिविर के साथ संस्कृत दिवस भी मनाया गया। कार्यक्रम में असम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. स्निग्धा दास राय, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन राय, संस्कृत भारती के प्रांत मंत्री डॉ. केशव लुइटेल तथा जिला अध्यक्ष डॉ. संधानी नाथ उपस्थित रहे। शिविर में संस्कृत भाषा के अध्ययन, प्रचार-प्रसार तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसी क्रम में 27 अगस्त को शिलचर कॉलेज में भी संस्कृत दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉलेज की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार सिंह तथा भौतिक विज्ञान के शिक्षक सुनील सिन्हा उपस्थित रहे। संस्कृत भारती की ओर से दक्षिण असम प्रांत के संपर्क प्रमुख डॉ. बुद्धदेव पुरकायस्थ ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन कॉलेज की शिक्षिका सुमिता सिन्हा ने किया। शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वक्ताओं ने संस्कृत की गौरवशाली परंपरा के साथ आधुनिक समाज में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
गत 30 अगस्त को शाम चार बजे संस्कृत भारती के प्रांत कार्यालय में संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में असम विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. शांति पोखरेल उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता प्रो. गोविंद शर्मा थे। कार्यक्रम का संचालन संस्कृत भारती के कार्यकर्ता राहुल दास ने किया। इस अवसर पर प्रांत कार्यकर्ता नेदे भूषण दास, डॉ. बुद्धदेव पुरकायस्थ, भवतोष चक्रवर्ती, सौरभ नाथ, अनन्या भट्टाचार्य सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता प्रो. गोविंद शर्मा ने संस्कृत भारती के विभिन्न आयामों एवं गतिविधियों की जानकारी दी। मुख्य अतिथि प्रो. शांति पोखरेल ने संस्कृत भाषा की आवश्यकता तथा वर्तमान दौर में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार रखा। अंत में शांतिमंत्र के पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
दूधपाटिल स्थित संस्कृत बाल केंद्र में भी संस्कृत दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विशिष्ट कवि चंद्र कुमार गोयाला एवं शिक्षक वीरचरण दास उपस्थित रहे। बालकों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं के समापन के बाद विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। पूरे कार्यक्रम का संचालन डॉ. बुद्धदेव पुरकायस्थ ने किया।
संस्कृत दिवस के आयोजन संस्कृत भारती तक ही सीमित नहीं रहे। विभिन्न विद्यालयों में भी पूरे सप्ताह विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। गत 31 अगस्त को सुबह 11 बजे जनकल्याण हाईस्कूल में संस्कृत दिवस मनाया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. देवाशीष प्रकाश सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संस्कृत भाषा की आवश्यकता और इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों की सहभागिता से विज्ञान प्रदर्शनी एवं गीत प्रतियोगिता भी आयोजित हुई।
इसी तरह उधारबंद के डीएनएचएस उच्च माध्यमिक विद्यालय में भी गत 29 अगस्त को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से संस्कृत दिवस मनाया गया। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से आयोजित कार्यक्रमों के जरिए संस्कृत भाषा के प्रति रुचि और जिज्ञासा बढ़ाने का प्रयास किया गया।
संस्कृत भारती की ओर से बताया गया कि संस्कृत को केवल प्राचीन भाषा के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा की महत्वपूर्ण संवाहक भाषा के रूप में नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करना इन आयोजनों का प्रमुख उद्देश्य है। शिक्षण संस्थानों में नियमित संस्कृत अध्ययन एवं अभ्यास का वातावरण तैयार करने तथा विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।