शिलचर, 13 अगस्त: राज्यसभा सांसद कणाद पुरकायस्थ ने बुधवार को संसद में असम समेत पूरे पूर्वोत्तर की गंभीर बाढ़ समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए बाढ़ प्रबंधन को राष्ट्रीय प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने पूर्वोत्तर के लिए दीर्घकालिक और समग्र बाढ़ प्रबंधन रणनीति तैयार कर बाढ़-रोधी क्षेत्र विकसित करने पर जोर दिया।
सांसद कणाद पुरकायस्थ ने कहा कि असम में बाढ़ अब हर वर्ष आने वाली प्राकृतिक आपदा के साथ-साथ गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट का रूप ले चुकी है। असम देश के सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित राज्यों में शामिल है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 39.58 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ प्रभावित है, जो राष्ट्रीय औसत से करीब चार गुना है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष औसतन 9.31 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ की चपेट में आती है।
हाल की भयावह बाढ़ का उल्लेख करते हुए सांसद ने कहा कि अब तक 99 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सात जिलों में 1.28 लाख से अधिक लोग अभी भी प्रभावित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों का भी उल्लेख किया।
कणाद पुरकायस्थ ने कहा कि पूर्वोत्तर में बाढ़ का कारण केवल अत्यधिक वर्षा नहीं है। बादल फटने, अंतरराष्ट्रीय सीमा से आने वाली नदियों के प्रवाह, नदी कटाव, नदी तल में गाद जमने, अपर्याप्त जल-संरक्षण ढांचे, तटबंधों के टूटने और जलवायु परिवर्तन जैसे अनेक कारक स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। इसलिए केवल अस्थायी उपायों से बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए ‘नॉर्थ ईस्ट इंटीग्रेटेड फ्लड मैनेजमेंट अथॉरिटी’ (North East Integrated Flood Management Authority) के गठन का प्रस्ताव रखा। उनके अनुसार, यह प्राधिकरण पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के बीच बाढ़ पूर्वानुमान, नदी घाटी नियोजन और आपदा प्रबंधन कार्यक्रमों में समन्वय स्थापित कर सकता है।
सांसद ने ब्रह्मपुत्र और बराक नदी घाटियों के लिए व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने, प्रमुख नदियों में ड्रेजिंग एवं गाद हटाने का कार्य तेज करने तथा आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से तटबंधों को मजबूत करने की मांग की।
उन्होंने उपग्रह आधारित निगरानी, डॉप्लर मौसम रडार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पूर्वानुमान और समुदाय आधारित अग्रिम चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से रियल-टाइम बाढ़ पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। इसके अलावा बाढ़-रोधी आवास, फसल सुरक्षा, नदी कटाव नियंत्रण और प्रभावित लोगों की आजीविका बहाली के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।