शून्य जीएसटी और तर्कसंगत दवा नीति की मांग को लेकर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिवों का मार्च

शिलचर, (रानू दत्त): फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया (एफएमआरएआई) की उत्तर-पूर्व क्षेत्रीय इकाई सीआरयू (एनईआर) के बैनर तले रविवार शाम शिलचर में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिवों ने एक विरोध मार्च निकालकर जनस्वास्थ्य, दवा मूल्य निर्धारण नीति तथा फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में कथित अनैतिक व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ आवाज बुलंद की।

मार्च के दौरान संगठन ने केंद्र सरकार से तर्कसंगत दवा नीति लागू करने, दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने, आम लोगों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने, दवाओं की कीमतों में कमी लाने तथा स्वास्थ्य क्षेत्र पर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का कम से कम 5 प्रतिशत व्यय करने की मांग की। साथ ही आवश्यक दवाओं पर शून्य जीएसटी लागू करने और सार्वजनिक क्षेत्र की दवा एवं वैक्सीन निर्माण इकाइयों को पुनर्जीवित करने की भी मांग उठाई गई।

संगठन ने आरोप लगाया कि अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से कई फार्मास्यूटिकल कंपनियां अनैतिक व्यावसायिक तरीकों का सहारा ले रही हैं, जबकि सरकारी निगरानी पर्याप्त नहीं है। एफएमआरएआई का कहना है कि सरकारी थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) को दवा मूल्य नियंत्रण प्रणाली से जोड़ने के कारण राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (एनएलईएम) में शामिल लगभग 850 दवाओं की कीमतों में करीब 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। संगठन ने मांग की कि दवाओं की कीमत बाजार आधारित न होकर उत्पादन लागत और उचित लाभ के आधार पर तय की जाए।

ऑनलाइन दवा बिक्री पर भी संगठन ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उसका दावा है कि देश के कुल दवा बाजार का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के नियंत्रण में है। संगठन के अनुसार टेलीविजन पर छूट और घर-घर दवा पहुंचाने के विज्ञापन ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 तथा फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशंस, 2015 की भावना के विपरीत हैं। उनका कहना है कि अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री जनस्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

एफएमआरएआई ने फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग के लिए एक समान और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता लागू करने की भी मांग की। संगठन का आरोप है कि चिकित्सकों से प्रिस्क्रिप्शन प्राप्त करने के लिए अब भी विभिन्न प्रकार के अनैतिक प्रलोभन और भ्रष्टाचार जारी हैं। इस संबंध में संगठन ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की है।

मार्च के दौरान संगठन ने आम नागरिकों से आंदोलन का समर्थन करने की अपील की तथा बताया कि उत्तर-पूर्व के विभिन्न जिलों में जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को मांग-पत्र सौंपे जाएंगे, ताकि जनस्वास्थ्य और मेडिकल रिप्रेजेंटेटिवों की आजीविका से जुड़े मुद्दों का शीघ्र समाधान हो सके।

कार्यक्रम में संगठन के सचिव रूपराज देव, अध्यक्ष अशोक भवाल, रॉबिन देव, उपाध्यक्ष राजेश सरकार, सह-सचिव अनुष्री दत्त, कार्यकारिणी सदस्य अंजना चक्रवर्ती, कोषाध्यक्ष फरीद अहमद सहित बड़ी संख्या में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव उपस्थित थे।

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