शिव

हर श्वास में है शिव,

हर आस में हैं शिव,

विश्वास में है शिव,

शिव ही है संरक्षक ।

अंतस प्रेरणा है शिव,

प्रेषक तत्व भी है शिव, 

फलीभूत संकल्प है शिव,

शिव ही हैं मार्गदर्शक ।

जन्म उत्पत्ति है शिव, 

अटल मृत्यु भी है शिव,

अनाहत नाद है शिव,

शिव ही है मोक्षकारक ।

आत्म बंधन है शिव,

प्राण प्रबंधन हैं शिव,

“आनंद” मिलन है शिव,

शिव ही है व्यवस्थापक ।

भूतकाल है शिव,

वर्तमान भी है शिव,

मंगलकारी है शिव,

शिव ही है कर्म संचालक ।

– मोनिका डागा “आनंद”, चेन्नई, तमिलनाडु 

आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद !

रचना ( स्वरचित व सर्वाधिकार सुरक्षित)

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