शिलांग में नेताजी-विवेकानंद की प्रतिमाओं पर हमले की निंदा

शिलांग: शिलांग में खासी स्टूडेंट्स यूनियन के आंदोलन के दौरान नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा तोड़े जाने और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना की ‘बंगला साहित्य सभा, असम’ ने कड़ी निंदा की है। संगठन ने बंगाली, असमिया समेत सभी गैर-खासी लोगों पर कथित हमलों को भी गंभीर चिंता का विषय बताया।

संगठन के महासचिव डॉ. प्रशांत चक्रवर्ती ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करना अधिकार है, लेकिन हिंसा और गैर-खासी लोगों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि शिलांग और मेघालय के विकास में बंगाली व असमिया समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है तथा नेताजी सुभाषचंद्र बोस, स्वामी विवेकानंद और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी महान विभूतियों का मेघालय से ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है।

सभा के अध्यक्ष ने मेघालय सरकार से ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यटकों और गैर-स्थायी निवासियों को निशाना बनाए जाने से मेघालय की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और राज्य की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संगठन ने असम और मेघालय के शांतिप्रिय लोगों से ऐसी घटनाओं के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का आह्वान किया।

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