शिलचर में 45वां सर्वभारतीय बांग्ला एकांकी नाटक प्रतियोगिता 21 मार्च से

शिलचर में 45वां सर्वभारतीय बांग्ला एकांकी नाटक प्रतियोगिता 21 मार्च से
शिलचर, 18 मार्च: असम के शिलचर शहर में आगामी 21 से 29 मार्च तक बंग भवन में 45वें सर्वभारतीय बांग्ला एकांकी नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित नाट्य उत्सव प्रख्यात रंगकर्मी नरेश चंद्र पाल की स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। संस्था द्वारा इस वर्ष लगभग 17 लख रुपए व्यय होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसी बीच आयोजकों को विधानसभा चुनाव के चलते आयोजन में कई प्रकार की समस्याएं भी आने का अंदेशा है। पत्रकार वार्ता में आयोजकों ने प्रशासन से बंग भवन के सामने का रास्ता ठीक करने और सरकार से आयोजन में आर्थिक सहयोग की अपील की।
आयोजकों के अनुसार, इस नौ दिवसीय नाट्य समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से 38 नामी नाट्य दल भाग लेंगे। प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से नाट्य प्रस्तुतियों का शुभारंभ होगा, जिसमें विविध विषयों पर आधारित एकांकी नाटकों का मंचन किया जाएगा।
इस वर्ष के आयोजन में पश्चिम बंगाल के चर्चित नाट्य समूह—चित्रपट, बाउड़िया और हावड़ा—अपनी विशेष प्रस्तुतियों से दर्शकों को आकर्षित करेंगे। इसके अलावा, प्रसिद्ध नाटक “नक्षी कांथार माठ” और “अन्यरूप” संगीत कार्यक्रम भी मुख्य आकर्षण रहेंगे।
इस संबंध में रूपम नाट्य संस्थान द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें बिभाष देब (अध्यक्ष), राजकुमार पाल (कार्यकारी अध्यक्ष), निखिल पाल (सचिव), कल्याण पाल, कुशल कर्मकार, नीलांजन पाल, परितोष चक्रवर्ती, भास्कर दास, इंदिरा साहा, अनुपम देब, जाओमिनाल रहमान, उत्तम सरकार, अशिमानंद बिस्वास, बाचा दास एवं सीमा पुरकायस्थ सहित अन्य सदस्य शामिल थे।
आयोजकों ने बताया कि इस नाट्य उत्सव को लेकर रंगमंच प्रेमियों में खासा उत्साह है और बड़ी संख्या में दर्शकों के जुटने की उम्मीद है। आयोजकों ने बताया कि 28 मार्च को प्रदर्शनी नाटक के लिए टिकट रहेगा इसलिए पहले से नाटक प्रेमी अपना टिकट संग्रह कर ले। उन्होंने सभी सांस्कृतिक प्रेमियों से इस आयोजन में शामिल होकर नाट्य कला को प्रोत्साहित करने की अपील की है।
21 मार्च को विश्व कविता दिवस के उपलक्ष में पश्चिम बंगाल से पांच लोगों की टीम शाम को 6:00 बजे 1 घंटे का एक कार्यक्रम करेगी। इसी दिन चार विशिष्ट लोगों को सम्मानित किया जाएगा, जिसमें तबला वादक भास्कर चौधरी, रविंद्र संगीत शिल्पी शिवानी ब्रह्मचारी, विशिष्ट कवि साहित्यकार आशुतोष दास और डॉक्टर विजय लक्ष्मी दास को सम्मानित किया जाएगा। पिछले वर्षों की भांति इस बार भी इस मलिक का विमोचन भी किया जाएगा।
सांस्कृतिक जगत के जानकारों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से क्षेत्र में रंगमंच और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलती है तथा युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।

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