शिलचर में भक्ति और उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्राएं, विभिन्न मंदिरों में उमड़ा हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब

शिलचर, 17 जुलाई। शिलचर शहर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पवित्र रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ धूमधाम से संपन्न हुई। शहर के घुंघुर स्थित राधा सुदर्शन मंदिर, अंबिकापट्टी स्थित इस्कॉन श्रीश्री राधा गोविंद वृंदावन मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक संस्थानों से भव्य रथयात्राएं निकाली गईं, जिनमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान के रथ की रस्सी खींची तथा सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

घुंघुर स्थित राधा सुदर्शन मंदिर में सुबह मंगल आरती के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का शुभारंभ हुआ। दिनभर पूजा-अर्चना, यज्ञ, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन तथा महाप्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। सायंकाल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को सुसज्जित रथ पर विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शंखध्वनि, घंटानाद और हरिनाम संकीर्तन के बीच निकली रथयात्रा मंदिर से तांबुटिला, एनआईटी, मेडिकल प्वाइंट होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची। बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग श्रद्धापूर्वक रथ की रस्सी खींचते नजर आए। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि रथ की रस्सी खींचने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। आयोजन के दौरान स्वयंसेवकों और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा एवं व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली। समापन पर श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरित किया गया।

वहीं, अंबिकापट्टी स्थित इस्कॉन श्रीश्री राधा गोविंद वृंदावन मंदिर में 28वीं पारंपरिक रथयात्रा भी अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। राज्य के मंत्री कौशिक राय ने पारंपरिक रीति के अनुसार स्वर्ण झाड़ू से रथ मार्ग की सफाई कर रथयात्रा का शुभारंभ किया और बाद में श्रद्धालुओं के साथ रथ की रस्सी भी खींची।

प्रातःकाल षोडशोपचार विधि से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना, भोग अर्पण तथा हरिनाम संकीर्तन के साथ उत्सव प्रारंभ हुआ। दोपहर में भगवान के विग्रह तथा इस्कॉन के संस्थापक आचार्य ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की प्रतिमा को सुसज्जित रथ पर स्थापित किया गया। इस अवसर पर मंत्री कौशिक राय ने कहा कि स्वामी प्रभुपाद ने श्रीकृष्ण के संदेश को विश्वभर में पहुंचाया और आज रथयात्रा अनेक देशों में प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और मानवता का संदेश दे रही है। उन्होंने सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

रथयात्रा में कीर्तन मंडलियों, मृदंग, करताल और भक्ति संगीत ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अनेक महिलाओं ने राधा स्वरूप में नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। यह रथयात्रा अंबिकापट्टी से प्रारंभ होकर चर्च रोड, शिलांगपट्टी, गांधीबाग, सेंट्रल रोड, नाजिरपट्टी, प्रेमतला, अस्पताल रोड और रंगीरखाड़ी होते हुए सुकांत सरणी स्थित अस्थायी गुंडिचा मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़, हरिनाम संकीर्तन और प्रसाद वितरण से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।

शहर के श्यामसुंदर अखाड़ा, नरसिंह मंदिर, गोपाल जिउ मंदिर, गौड़ीय मठ, राधा गोपीनाथ मंदिर तथा राधामाधव जिउ मंदिर सहित अन्य धार्मिक संस्थानों से भी रथयात्राएं निकाली गईं। विभिन्न मोहल्लों में बच्चों ने भी अपने छोटे-छोटे सजे हुए रथों के साथ शोभायात्राएं निकालकर उत्सव की शोभा बढ़ाई। तुलापट्टी और राधामाधव रोड पर लगे पारंपरिक रथ मेले में मिट्टी से बनी भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं सहित विभिन्न खिलौनों की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी।

हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता, भक्ति, सामाजिक समरसता और धार्मिक सौहार्द के बीच संपन्न हुई शिलचर की रथयात्राओं ने एक बार फिर शहर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को जीवंत कर दिया।

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