निहार कांति राय, उधारबंद, 07 जूलाई
बराक घाटी के लोगों का लंबे समय से सपना रहा है कि क्षेत्र में बेहतर राष्ट्रीय राजमार्ग व्यवस्था विकसित हो। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा जिस आधुनिक राजमार्ग का सपना दिखाया गया था, उसके पूरा होने से शिलचर और देश के अन्य हिस्सों के बीच आवागमन और अधिक सुगम होने की उम्मीद थी। लेकिन यह सपना आज भी अधूरा नजर आ रहा है।
वर्तमान में शिलचर से डोलू जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर झापिरबंद और टिपरा पुंजी क्षेत्र की स्थिति बेहद दयनीय है। सड़क के एक हिस्से में बड़े-बड़े गड्ढे बन जाने से यह राजमार्ग किसी सड़क से अधिक तालाब जैसा दिखाई देता है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि यह मार्ग अब राष्ट्रीय राजमार्ग नहीं, बल्कि “मौत का रास्ता” बन चुका है।
पिछले कई महीनों से सड़क की यही स्थिति बनी हुई है। ऑटो, टोटो, टैक्सी तथा अन्य छोटे-बड़े वाहन चालक प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। छोटे-मोटे सड़क हादसे और वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं लगभग रोजमर्रा की बात बन गई हैं।
शनिवार को झापिरबंद क्षेत्र के दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने हमारे संवाददाता को घेरकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि लंबे समय से वे और वाहन चालक इस बदहाल सड़क के कारण भारी परेशानी झेल रहे हैं। कई बार वाहनों के पहिए गहरे गड्ढों में फंस जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है।
टिपरा पुंजी क्षेत्र के निवासियों ने बताया कि इस मार्ग से भारी मालवाहक वाहन भी गुजरते हैं, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा गड्ढों की मरम्मत को लेकर कोई गंभीर पहल नहीं की जा रही है। संभावित बड़े हादसों को रोकने के लिए स्थानीय लोगों ने स्वयं अस्थायी अवरोध (टोल गेट जैसी व्यवस्था) लगाकर वाहनों को अत्यंत सावधानी से गुजरने की सलाह देनी शुरू कर दी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि राष्ट्रीय राजमार्ग की ही ऐसी बदहाल स्थिति है, तो अन्य ग्रामीण और संपर्क सड़कों की हालत का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
क्षेत्रवासियों ने उधारबंद के विधायक राजदीप गोयाला, राज्य के नगर विकास, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री कौशिक राय तथा मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित विभाग को शीघ्र सड़क की मरम्मत के निर्देश दिए जाएं, ताकि किसी बड़े सड़क हादसे से पहले इस समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।