प्रीतम दास हाइलाकांदी, ९ अक्टूबर: ग्रामीण किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाने तथा पशुपालन को एक लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन कृषि विज्ञान केंद्र (ICAR-KVK), हाइलाकांदी द्वारा आयोजित वैज्ञानिक पद्धति से बकरी पालन विषयक १० दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।३० सितंबर से ९अक्टूबर तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न गांवों के ३० किसानों ने भाग लिया।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बकरी पालन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से परिचित कराना उनके व्यावहारिक कौशल को बढ़ाना तथा पशुपालन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह प्रशस्त करना था। प्रशिक्षणार्थियों को विशेष रूप से बताया गया कि पारंपरिक तरीकों के स्थान पर वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर बकरी पालन को किस प्रकार अधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।
इस कार्यक्रम का समन्वय ICAR-KVK हाइलाकांदी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. विजय छेत्री ने किया।३० सितंबर को आयोजित उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता नाबार्ड (NABARD) के जिला विकास प्रबंधक (DDM) श्री आयुष्मान यश ने की। कार्यक्रम में हाइलाकांदी जिले के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग के जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जयंत कुमार तालुकदार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके अतिरिक्त ICAR-KVK हाइलाकांदी के पादप संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. सौरभ शर्मा, सब्जी विज्ञान विशेषज्ञ श्री राजा राम बंकार तथा जलीय कृषि विशेषज्ञ श्री आंगम बलेश्वर सिंह भी उपस्थित थे।दस दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान किसानों को उन्नत नस्ल की बकरियों का चयन प्रजनन योग्य बकरियों की पहचान उपयुक्त आवास का निर्माण फार्म प्रबंधन तथा संतुलित आहार उपलब्ध कराने के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही चारा उत्पादन खनिज पूरक आहार का उपयोग प्रजनन प्रबंधन बकरी के बच्चों की देखभाल तथा बकरियों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विशेष जोर दिया गया।बकरियों को विभिन्न रोगों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण कृमिनाशक दवाओं का प्रयोग पशुशाला में स्वच्छता बनाए रखने तथा जैव सुरक्षा संबंधी उपायों का पालन करने की आवश्यकता के बारे में भी प्रशिक्षणार्थियों को जागरूक किया गया।
प्रशिक्षण को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए व्यावहारिक प्रदर्शन विशेषज्ञों के साथ विचार विमर्श तथा एक उन्नत बकरी फार्म के भ्रमण की व्यवस्था भी की गई। इससे प्रतिभागी किसानों को वास्तविक परिस्थितियों में वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू बकरी पालन की आर्थिक एवं व्यावसायिक संभावनाओं से संबंधित था। किसानों को उत्पादन लागत और लाभ का आकलन करने व्यावसायिक योजना तैयार करने, उद्यम स्थापित करने के कौशल विकसित करने मूल्य संवर्धन बाजार से जुड़ाव तथा बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने की प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई।
इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठन (FPO) की भूमिका तथा सामूहिक प्रयासों के माध्यम से किसानों को अधिक लाभ प्राप्त करने के अवसरों पर भी चर्चा की गई।समापन समारोह में पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुस्तफिजुर अहमद प्रखंड पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मृण्मय चौधरी तथा ICAR-KVK, हाइलाकांदी के कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।किसानों ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण वैज्ञानिक पद्धति से बकरी पालन करने के प्रति उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ साथ भविष्य में स्वयं का पशुपालन आधारित व्यवसाय स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इसके पश्चात सामूहिक छायाचित्र के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।उल्लेखनीय है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में बकरी पालन की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं। आशा है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को वैज्ञानिक ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाने के साथ साथ हाइलाकांदी जिले में पशुपालन आधारित लघु उद्यमों के विकास में भी सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।