विधा: गीत कविता
दिनांक: १७ सितंबर
उपलक्ष्य : आदरणीय प्रधान मंत्री जी का जन्म दिन
“आज का गीत – ७६ “
“आओ फिर एक दिया जलायें”
आशीर्वाद मिले राष्ट्र को,
सच में सब घर का अँधेरा जाये,
किसी कोने, किसी तिमिर का
नाम-ओ-निशाँ न रहने पाये।
अब तो कुछ दिन बदलें साथी,
मुस्कानों की बगिया बनायें—
छोटी-छोटी खुशियाँ पहले
सबकी आँखों में भर जायें।
आओ फिर एक दिया जलायें,
आओ फिर एक दिया जलायें।
अबके ऐसा ही करना साथी—
हर प्राण में विश्वास जगे,
सूनी आँखों में स्वप्न उतरें,
हर अधर पर मधुमास जगे।
भूखा कोई रात न सोये,
कोई मन निराश न पाये,
जिसके हिस्से धूप न पहुँची,
उसके आँगन सूरज आये।
आओ फिर एक दिया जलायें,
आओ फिर एक दिया जलायें।
एक दिया हो प्रेम का साथी,
एक दिया हो नेह का,
एक दिया हो सत्य-सद्भाव का,
एक दिया हो स्नेह का।
अपने हिस्से की रोशनी से
किसी और का दीप जलायें,
हम जलें तो साथ जलें सब—
हम हँसें तो सब मुस्कायें।
आओ फिर एक दिया जलायें,
आओ फिर एक दिया जलायें।
न कोई छोटा, न कोई बड़ा हो,
सबके हिस्से आकाश रहे,
मेहनत करने वाले हाथों में
कल का सुंदर विश्वास रहे।
देश तभी तो सच में उजले,
जब हर चेहरा खिलता जाये—
एक दिया तुम, एक दिया हम,
मिलकर पूरा देश जगायें।
अबके ऐसा ही करना साथी—
हर प्राण में प्राण बस जाये,
मन से मन की दूरी मिटे और
भारत अपना दीप बन जाये।
आओ फिर एक दिया जलायें,
आओ फिर एक दिया जलायें।।
हरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव
मौलिक व स्वरचित
१७-०९-२०२६