विवेकानंद के आदर्शों से ही भारत पुनः विश्वगुरु बनेगा : स्वामी गणधीशानंद जी महाराज
उधारबंद, निहार कांति राय | प्रेरणा भारती
भारत को पुनः विश्वसभा में श्रेष्ठ स्थान पर प्रतिष्ठित करने का जो महान यज्ञ ठाकुर श्रीरामकृष्ण, मां शारदा देवी ने आरंभ किया था, उस यज्ञ के अधिकारी हम सभी हैं। यह प्रेरणादायी उद्गार शिलचर रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम संघ के पूज्यपाद स्वामी गणधीशानंद जी महाराज ने व्यक्त किए।
स्वामी विवेकानंद की 164वीं पुण्य जयंती के अवसर पर उधारबंद श्री श्री रामकृष्ण शारदा सेवा समिति की शाखा विवेकानंद पाठ मंदिर द्वारा आयोजित जन्म जयंती समारोह के अंतिम दिन संध्या को उधारबंद ब्लॉक ऑडिटोरियम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में महाराज ने अपने आशीर्वचन में यह बातें कही।
स्वामी गणधीशानंद जी महाराज ने कहा कि हम सभी इस यज्ञ में सहभागी हैं, हमने यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित की है। इसलिए भारत को विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान दिलाने के लिए हमें चरित्रवान बनना होगा, सत्य की स्थापना अपने जीवन में करनी होगी तथा श्रद्धा, प्रेम और करुणा से संपूर्ण विश्व को आलोकित करना होगा। स्वामी विवेकानंद के महान आदर्शों से दीक्षित होकर उन आदर्शों को विश्वभर में फैलाना ही हमारा कर्तव्य है।
अपने वक्तव्य की शुरुआत में महाराज ने ठाकुर श्रीरामकृष्ण, मां शारदा और स्वामी विवेकानंद के अवतरण का आध्यात्मिक कारण स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म संसार को ग्रसित करता है, तब धर्म की स्थापना हेतु ईश्वर मानव रूप में अवतरित होते हैं—जैसे श्रीराम, श्रीकृष्ण, चैतन्य महाप्रभु और बुद्धदेव। उसी परंपरा में बाद में श्रीरामकृष्ण परमहंस का आगमन हुआ।
जहाँ श्रीराम धनुष लेकर और श्रीकृष्ण शंख-चक्र-गदा लेकर आए, वहीं श्रीरामकृष्ण प्रेम, श्रद्धा और करुणा को ही अपना शस्त्र बनाकर संसार के अधर्म का नाश करने आए।
महाराज ने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा को श्रीकृष्ण ने श्रद्धा और प्रेम के माध्यम से परिवर्तित किया—जो भारतीय ऋषि परंपरा की शक्ति को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने नरेंद्रनाथ के विवेकानंद बनने की यात्रा के अनेक बाल्यकालीन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए सत्य और न्याय के प्रति उनकी अडिग निष्ठा को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में रामकृष्ण शारदा सेवा समिति के अध्यक्ष देवतोष सेन, लक्ष्मीपुर के पूर्व विधायक राजदीप ग्वाला ने भी अपने विचार रखे। स्वागत भाषण समिति के सचिव किशोर भट्टाचार्य ने दिया।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ विवेकानंद पाठ मंदिर के सदस्यों द्वारा सामूहिक संगीत से हुआ। इसके पश्चात पाठ मंदिर के शिक्षा केंद्र चांदखीरा के विद्यार्थियों ने विविध प्रस्तुतियाँ दीं। नृत्यांजलि कार्यक्रम में नटराज नृत्य संस्था, निक्कन सुरबाला नृत्य निकेतन, रुद्र डांस अकादमी सहित अन्य संस्थाओं के कलाकारों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किए।
दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में अध्यक्ष देवतोष सेन के साथ पाठ मंदिर के वास्तुकार हरिहर चक्रवर्ती, राजदीप गोयाला, विवेकानंद मंडल के अध्यक्ष नबरुण चक्रवर्ती, प्रसंजित भट्टाचार्य, उधारबंद जीपी सभानेत्री काकली कर, आंचलिक पंचायत सभानेत्री अमित चक्रवर्ती सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही कश्मीर में आतंकवादी हमले में शहीद राजीव नुनिया को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके पिता को मरणोपरांत सम्मान पत्र प्रदान किया गया। एक मिनट का मौन रखकर शहीद को नमन किया गया।
संध्या काल में स्वामी विवेकानंद के चरणकमलों में 164 दीप प्रज्वलित किए गए। प्रातःकाल स्वामीजी की प्रतिकृति के साथ “विवेक के पथ पर चलो” पदयात्रा, क्विज प्रतियोगिता सहित अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, समिति एवं पाठ मंदिर के सदस्य-सदस्याएं उपस्थित रहे।