

विख्यात पहलवान, व्यवसायी व समाजसेवी विश्वनाथ ग्वाला के निधन से घुंघूर इलाके में शोक का माहौल हो गया। पिछले सोमवार को अस्वस्थ होने पर उन्हें स्थानीय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां किडनी फेल होने के कारण चिकित्सकों का सारा प्रयास व्यर्थ करते हुए 20 अप्रैल की भोर में 2.45 पर उनकी आत्मा परमात्मा में विलीन हो गई। गरीब परिवार से होकर खेती गृहस्ती का काम करते हुए दूध का व्यवसाय करते थे। सहज सरल स्वभाव के 71 वर्षीय विश्वनाथ ग्वाला ने अपने जीवन में संघर्ष और कठिन परिश्रम से परिवार को स्थापित किया। कुश्ती के लिए विख्यात स्वर्गीय ग्वाला 16 साल बराक बेली के चैंपियन रहे। दो-तीन साल पहले घर में जब डकैती हुई वृद्धावस्था में भी डकैतों से भिड़ गए और घायल हुए। सामाजिक प्रवृत्ति के स्वर्गीय ग्वाला ने अपने गांव में श्मशान के लिए भूमि दान दी। विभिन्न सामाजिक कार्यों में सक्रिय योगदान रहता था। हनुमान जी के परम भक्त स्वर्गीय ग्वाला व्यवहार कुशल और धार्मिक व्यक्ति थे। 2011 में उन्होंने ईट भट्टे का व्यवसाय शुरू किया और आज उनके तीनों बेटे क्रमश: सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं। विश्वनाथ ग्वाला अपने पीछे धर्मपत्नी श्रीमती जानकी देवी, भाई संग्राम ग्वाला, 3 पुत्र रामविलास भीम, रामनारायण हेम व निर्मल ग्वाला, दो बेटियां लखी और सीता, भतीजा दीपक, 2 पौत्र व 4 पौत्रियों सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी अंतिम यात्रा में आज हिंदीभाषी समन्वय मंच शिलचर की ओर से दिलीप कुमार, रामनारायण नुनिया, गणेश लाल छत्री, रितेश नुनिया, स्थानीय प्रतिष्ठित समाजसेवी कंचन नुनिया सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनका अंतिम संस्कार आज गांव के श्मशान में कर दिया गया।