गुवाहाटी के भरलुमुख स्थित आलोक भवन में आज आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य संगठन सचिव कृष्णकांत बरा द्वारा प्रदत्त वक्तव्य
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने आगामी 29 मई से 12 जून, 2025 तक देशभर में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ नामक एक पूर्व-खरीफ कृषि अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य देश के 700 जिलों में 1 से 1.5 करोड़ किसानों को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के प्रति जागरूक करना है।
हमारे असम राज्य में भी इस अभियान के अंतर्गत 26 जिलों के 3250 गांवों और 5 लाख से अधिक किसानों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कृषि विभाग, अन्य संबद्ध विभागों तथा विभिन्न कृषि विशेषज्ञों के साथ मिलकर 52 समूहों का गठन किया गया है। विशेष रूप से खरीफ फसलों के उत्पादन में सहायक सतत तकनीकों का प्रचार-प्रसार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों का उपयोग, कृषि क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं का अध्ययन तथा उस पर प्राथमिकता के आधार पर अनुसंधान की रूपरेखा तैयार करना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।
भारतीय किसान संघ ने विगत वर्षों में किसानों के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न सरकारी विभागों, प्रशासन के सामूहिक प्रयासों के साथ-साथ कृषक समाज की संयुक्त सहभागिता का आह्वान किया है। किसानों की मूलभूत समस्याओं का समग्र दृष्टिकोण से अध्ययन कर सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सक्षम, आत्मनिर्भर किसान तथा आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण संभव है। प्रत्येक गांव यदि आत्मनिर्भर हो जाए, तभी हम एक समृद्ध भारत की कल्पना कर सकते हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने भारतीय किसान संघ से इस अभियान में भाग लेने तथा सरकारी विभागों से भी किसान संघ को इस अभियान में सम्मिलित करने का आह्वान किया है। हम इस पवित्र प्रयास के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री महोदय को धन्यवाद ज्ञापित करते हैं तथा कृषि विभाग एवं ICAR को इस अभियान की सफलता हेतु शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं।
भारतीय किसान संघ की ग्राम स्तर तक की सभी समितियां इस अभियान में सहयोग प्रदान करेंगी और असम के समस्त कृषक समाज से इस अभियान के कार्यक्रमों में भाग लेकर लाभ उठाने का आह्वान करती हैं।
किसान पंजीकरण पोर्टल से संबंधित समस्याएं तथा इस दिशा में सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाने की किसान संघ की मांग
किसान पंजीकरण पोर्टल की समस्याओं के समाधान हेतु सरकार द्वारा शीघ्र प्रभावी कदम उठाने की भारतीय किसान संघ की मांग।
असम के अधिकांश किसान भूमि पट्टे में अपने नाम दर्ज न होने के कारण पोर्टल पर पंजीकरण नहीं करवा पा रहे हैं। अतः हम सरकार से मांग करते हैं कि यदि किसान के रक्त संबंधी पिता, माता या दादा का नाम भूमि पट्टे में दर्ज है, तो उस किसान को पोर्टल पर पंजीकरण करने की सुविधा प्रदान की जाए।
हमारी बस्ती की जमीनों पर बड़ी संख्या में वास्तविक किसान उद्यान फसलों जैसे सुपारी, पान, नारियल, अदरक, हल्दी, फल-फूल, नींबू आदि की खेती कर स्वावलंबी होकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। दुर्भाग्यवश, उन्हें पोर्टल पर पंजीकरण की सुविधा नहीं है। अतः सरकार को इन किसानों को भी पंजीकरण की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। इसके लिए एक जमीनी सर्वेक्षण कर भूमि की निश्चित सीमा निर्धारित करनी होगी।
जिन किसानों ने दूसरों से व्यक्तिगत रूप से जमीन खरीदी है और उस जमीन पर खेती कर जीवनयापन कर रहे हैं, किंतु उनके नाम भूमि पट्टे में दर्ज नहीं हैं, उन्हें भूमि क्रय दस्तावेज के आधार पर पोर्टल में पंजीकरण की सुविधा दी जानी चाहिए।
कई किसान भूमि लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं। ऐसे किसानों को भी उनकी कृषि भूमि के लीज दस्तावेज के आधार पर पंजीकरण की सुविधा दी जानी चाहिए।
वन विभाग द्वारा प्रदान की गई भूमि पर खेती कर रहे वास्तविक खिलंजिया किसानों को भी किसान पंजीकरण पोर्टल में पंजीकरण की सुविधा दी जानी चाहिए, बशर्ते कि उनके पास सही दस्तावेज एवं भूमि प्राप्ति के प्रमाण हों। एक प्रेस विज्ञप्ति में भारतीय किसान संघ, असम के राज्य महासचिव रूपक गोगोई ने उपरोक्त जानकारी प्रदान की।