वसीयत का हश्र – शिव शंकर सिंह 

अनिल मिश्र,पटना-कहानी विथ कॉफी की 26 कड़ी में कथा सम्राट प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी बूढ़ी काकी पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने मानवीय भावनाओं के कमजोर पड़ने , भारतीय संस्कृति का क्षरण एवं वसीयत का हश्र बताया गया। इस  कार्यक्रम का आयोजन बिहार प्रदेश के गया जिला अंतर्गत टिकारी शहर के अंदर किला परिसर में किया गया। कहानी का पाठ  लोकप्रिय युवा शायर नदीम हसन ने किया। संवेदनाओं के साथ उनकी आवाज के उतार- चढ़ाव ने लोगों को कहानी से बांधे रखा। हिंदी के सेवानिवृत प्राध्यापक और शकूराबाद कालेज के पूर्व प्राचार्य शिवशंकर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हमें अपनी संस्कृति को बचाने की जरूरत है। 

बनारस हिंदू विश्विद्यालय में हिंदी के शोध छात्र महेश कुमार ने कहानी बूढ़ी काकी की रचना के काल के  पृष्ठभूमि और तत्कालीन वातावरण की चर्चा कर बड़ी गंभीरता से यह बताने में सफल रहे कि इस कहानी के माध्यम से लेखक ने तत्कालीन समाज में घट रहे  परिवर्तन की ओर उन्होंने पाठकों का ध्यान खींचा है।  मानवीय भावनाओं लगातार क्षरण समाज को गहरे छू रहा था। उन्होंने बताया कि कैसे समाज में छुआछूत व्याप्त था। शहर के लोकप्रिय हिंदी विषय के शिक्षक डॉ राजन ने कहा कि नैतिक मूल्यों के क्षरण की वजह से वसीयत करना जोखिम भरी जिम्मेदारी बन गया है।

पैक्स अध्यक्ष सत्येंद्र शर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम में: 

 शामिल होकर मुझे प्रसन्नता महसूस हो रही हैं । ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को  साहित्य और संवेदना से जोड़ने का कार्य करते हैं।हिमांशु शेखर ने कहा कि आज भी बूढ़ी काकी समाज में मौजूद है। हमें अपने बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। 

प्रो. मुंद्रिका प्रसाद नायक ने समाज में व्याप्त विषमता पर प्रकाश डाला और समानता स्थापित करने पर बल दिया।पूर्व मुखिया राम लखन भगत ने कहा कि गरीबी से निकलर बड़े पद पर आसीन होने वाला व्यक्ति द्वारा भी गरीबों से दूरी बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

कार्यक्रम को राम प्रसाद सिंह बाल्मीकि प्रसाद,

सुरेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार नारायण मिश्रा, बेचन चंद्रवंशी आदि वक्ताओं ने सम्बोधित किया। बी पी एन ग्लोबल स्कूल के निदेशक नामित राजा ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सभी वक्ताओं, श्रोताओं और ऑन लाइन जुड़े हुए श्रोताओं को  अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद दिया । उन्होंने कहा कि आप सभी के सहयोग से चल रहा यह कार्यक्रम शहर में अनूठा है। कार्यक्रम का संचालन संजय अथर्व ने किया।

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