लॉरेंस विश्नोई और सलमान खान में बड़ा अपराधी कौन ?   (  सलमान खान को सजा क्यों नहीं मिलनी चाहिए ?/ गुलशन कुमार की हत्या/ दाऊद की सभा में नंगे नाचते थे फिल्मी सितारे  )

       आचार्य श्रीहरि
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लॉरेंस विश्नोई और सलमान खान में बड़ा अपराधी कौन? यह प्रश्न सोशल मीडिया की परिधि में गूंज रहा है। दोनों के अपराध को सोशल मीडिया में बेपर्द किया जा रहा है, गिनाया जा रहा है। कानूनी तौर पर अभी लॉरेंस विश्नोई सजा प्राप्त नहीं है पर वह दुर्दांत अपराधी है, उसका गिरोह देश भर में फैला हुआ है। जबकि सलमान खान सजायाफ्ता अपराधी है, यानी कि उसे कोर्ट से एक अपराध में सजा मिल चुकी है, ऊपरी कोर्ट से उसे जमानत मिली है, उसकी सजा समाप्त नहीं हुई है, सजा बरकरार है। कोई एक नहीं बल्कि एक से अधिक मुकदमे में सलमान खान आपराधिक तौर पर आरोपी है। सलमान खान जंगल राज का प्रतीक भी है, पुलिस, कोर्ट और सरकार भी उसके मामले में त्वरित और चाकचौबंद से उदाशीनता बरतती है। सलमान खान का सेलिब्रिटी कद और हैसियत मत देखिए बल्कि उसकी आपराधिक करतूत और हिंसा देखिए।
         टाइगर श्रॉफ पर तथाकथित लॉरेंस विश्नोई गिरोह के हमले के बाद कई प्रकार के प्रश्न उठे हैं और फिल्मी सितारों के प्रति बेकार की सहानुभूति प्रकट की जा रही है।  क्या यह हमला सही में लॉरेंस विश्नोई करा रहा है जबकि वह साबरमती जेल में बंद है, जहां पर कड़ा पहरा लगा हुआ है।  साबरमती जेल अपनी कड़ाई के लिए जानी जाती है, वहां परिन्दा भी पर नहीं मार सकता है। फिर लॉरेंस विश्नोई पर कैसे मार रहा है, साबरमती जेल से उसकी हिंसा कैसे फिल्मी दुनियां पर बरस रही है, कैसे वह हिंसा का रोजगार चला रहा है? क्या उसे मोहरा बनाया जा रहा है, उसके नाम पर कोई दूसरा खेल कर रहा है।
       टाइगर श्रॉफ कोई बड़ा एक्टर तो है नहीं, वह कोई सलमान खान, आमिर खान, शाहरुख खान तो है नहीं? फिर उसको निशाना क्यों बनाया गया, यह जांच और विचारण का प्रमुख विषय है। बड़े एक्टरों से बड़ी वसूली हो सकती है, ऐसा अपराध गणित हो सकता है पर छोटे एक्टर टाइगर श्रॉफ से वसूली का गणित बनता नहीं है। फिर सलमान खान और शाहरुख खान जैसी उसकी हैसियत भी नहीं है, वह किसी विवाद में भी शामिल नहीं रहा है और न ही उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि वह सलमान खान का प्रवक्ता या गॉडफादर भी नहीं है। हमले के शिकार हुए टाइगर श्रॉफ को सलमान खान देखने तक नहीं गया और न ही हमले के खिलाफ कोई बयान जारी किया। यह बताता है कि सलमान खान कितना असंवेदनहीन है। जानना यह जरूरी है कि सलमान खान के नाम पर ही टाइगर श्रॉफ पर हमला हुआ है। मीडिया में यही प्रचारित है कि सलमान खान के साथ फिल्मों में काम करने के कारण ही टाइगर श्रॉफ को हमले का शिकार बनाया गया, यह भी कहा गया कि लॉरेंस विश्नोई गिरोह का कहना है कि जो भी सलमान खान के साथ काम करेगा उस पर टाइगर श्रॉफ की तरह ही हमला होगा।
         क्या सही में फिल्मी सितारे दूध के धुले हुए हैं, क्या फिल्मी सितारे अपराधी मानसिकता नहीं रखते हैं, क्या सही में फिल्मी सितारे जिहादी मानसिकता नहीं रखते हैं, क्या सही में फिल्मी सितारे पाकिस्तान परस्ती की मानसिकता नहीं रखते हैं, क्या सही में सनातन संहार की मानसिकता नहीं रखते हैं? देश की अस्मिता खोर है फिल्मी दुनियां। देश की संस्कृति और सभ्यता का मुंबई फिल्मी दुनियां दुश्मन हैं, क्योंकि मुंबई फिल्मी दुनियां आयातित और हिंसक संस्कृति का सहचर है और जिहादी मानसिकता भी रखती है।
          मुम्बई फिल्मी दुनियां के अपराधीकरण को कौन नहीं जानता है,मुम्बई फिल्मी दुनियां की अनैतिकता को कौन नहीं जानता है, मुम्बई फिल्मी दुनियां की हिंसक मानसिकता को कौन नहीं जानता है? मुंबई फिल्मी सितारे माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की उंगलियों पर नाचते थे। खासकर मुंबई फिल्मी की बड़ी बड़ी नायिकाएं दाऊद इब्राहिम के दरबार में नंगे नाचती थी, संगीतकार संगत करते थे। जिस किसी बड़ी से बड़ी नायिकाओं पर दाऊद इब्राहिम का दिल आ जाता था, उसे फौरन अपने दरबार में उपस्थित करने का फरमान जारी कर देता था, फिर उसके गुर्गे पकड़ उपस्थित कर दिया करते थे, मन की इच्छा के अनुसार दाऊद इब्राहिम नायिकाओं से मुजरा करता था और बेड भी गर्म कराता था। कहा जाता था कि उस काल मे शायद ही कोई ऐसी हीरोइन होगी जो दाऊद इब्राहिम के दरबार में नहीं नाची होगी या फिर दाऊद इब्राहिम की चरण वंदना नहीं की होगी। मंदाकिनी और मोनिका बेदी तो कुख्यात ही थी। सारे के सारे फिल्मी सितारे माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम की चरण वंदना करते थे। दाऊद इब्राहिम ने पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आई आई एस के कहने पर मुंबई विस्फोट कांड को अंजाम दिया था जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। मुंबई विस्फोट कांड में दाऊद इब्राहिम को इस्लाम के आधार पर फिल्मी दुनियां के सितारों ने मदद की थी और पैसे पानी की तरह बहाया गया था।
        पाकिस्तान परस्ती भी देख लीजिए। दिलीप कुमार उर्फ यूसुफ खान को पाकिस्तान ने अपना सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार दिया था। यह पुरस्कार दिलीप कुमार को पाकिस्तान परस्ती और मुम्बई  फिल्मी दुनियां को जिहादी करन, इस्लामिक करन करने के लिए दिया गया था। कारगिल युद्ध के दौरान दिलीप कुमार से पाकिस्तानी पुरस्कार को वापस करने की मांग हुई थी, पर दिलीप कुमार ने पाकिस्तानी पुरस्कार वापस करने से इंकार कर दिया था, क्योंकि दिलीप कुमार के लिए भारत एक काफ़िर देश था और काफ़िर की मदद करना इस्लाम में हराम है। भारत के घोर विरोधी तुर्की के शासक के घर आमिर खान पहुंच कर मुस्लिम भाईचारा प्रदर्शित करता है, देश के दुश्मनों के साथ बंद कमरे में मंत्रणा करता है। शाहरुख खान ने कहा था कि भारत में उन्हें डर लगता है। शाहरुख खान ने यह भी कहा था कि नरेंद्र मोदी भारत का प्रधानमंत्री बनता है तो फिर भी वह देश छोड़ देगा पर उसने देश नहीं छोड़ा। शाहरुख खान को भारत जैसी आजादी और कहा मिलेगी, भारत का अन्न खाकर भारत की ही कब्र खोदने की आजादी कहा मिलेगी?
         हिंदू धर्म का संहार करने को लेकर मुम्बई फिल्मी दुनियां सक्रिय रहती है, हिंसक रहती है। याद कीजिए गुनाहो का देवता फिल्म को। यह नाम हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए रखा गया था। गुनाह शब्द उर्दू, अरबी और फारसी का सम्मिलित औलाद है।  क्या कभी आपने किसी फिल्म का नाम गुनाहों का अल्ला देखा है?  आमिर खान ने एक सीरियल बनाई थी, हिंदू धर्म के परम्पराओं को अंधविश्वास बताकर खूब खिल्ली उड़ाई थी पर उसने इस्लाम की कुरीतियों और अंध विश्वासों और जिहाद को बेपर्दा करना जरूरी नहीं समझा था। हिंदू धर्म को कलंकित करने की अनेक प्रक्रियाएं चली गई हैं।
        जिन्होंने भी मुम्बई फिल्मी दुनियां के इस्लामीकरण और जिहादी करण के खिलाफ बात उठाई उन सभी को हाशिए पर खदेड़ दिया गया। उदाहरण के लिए अनुपम खेर, अभिजीत और गजेंद्र चौहान का नाम लिया जा सकता है। सोनू निगम ने जब अजान के खिलाफ आवाज उठाई तब सोनू निगम के खिलाफ जिहादी हिंसक प्रक्रियाएं सक्रिय हो गई, उन्हें फिल्मी दुनियां में काम मिलना बंद हो गया। नसरुद्दीन शाह की मुस्लिम परस्ती पर जब नाना पाटेकर ने आवाज उठाई तो फिर उन्हें फिल्मी दुनियां ने अलग थलग करने में कोई कसर नही छोड़ी थी। पर नाना पाटेकर पर मुस्लिम विरोध का कोई असर नहीं पड़ा, क्योंकि नाना पाटेकर अपने शर्तों पर कार्य करने की क्षमता रखते थे।
         गुलशन कुमार की हत्या आपको याद कराता हूं। गुलशन कुमार ने सनातनी भजनों की धूम मचा दी थी। फिल्मी दुनियां एक सनातनी को इस प्रकार सफल होते हुए देखना कैसे स्वीकार कर सकती थी,  कई मुस्लिम संगीत कारों का भट्ठा बैठ गया था।  नदीम संगीतकार के चोले में जिहादी था, हिंसक था। नदीम ने साजिश कर गुलशन कुमार की दिनदहाड़े हत्या करा देता है। नदीम अभी ब्रिटेन में रह रहा है। ऐसी कई हत्याएं मुंबई फिल्मी दुनियां में हो चुकी है।
          लॉरेंस विश्नोई से बड़ा अपराधी और हिंसक सलमान खान है, सलमान खान सरेआम हिरणों की हत्या करता है, अवैध हथियार रखता है, मुंबई के फुटपाथ पर सोये हुए मजदूरों पर कार चढ़ाकर रौंद देता है, कई मजदूरों की हत्या कर देता है, सरेआम नायिकाओं को अगवा कर अपनी हवश मिटाता है, साथी कलाकारों को धमकी देता है। फिर भी पुलिस, कोर्ट और सरकार उसे सजा नहीं दिला पाती हैं। कोर्ट और पुलिस को पैसे और हैसियत के बल पर खरीद लेता है। मुंबई हाईकोर्ट का जज पांच मिनट में पांच सौ अधिक सजा फाइल को पढ़ने का रिकॉर्ड कायम कर लेता है और करिश्मा दिखा देता है और सलमान खान को जमानत मिल जाती है।
             जब कानून अंधा हो जाता है तब लॉरेंस विश्नोई, सलमान खान , दाऊद इब्राहिम जैसी हिंसा गदर काटती है, मानवता का खून करती हैं। सलमान खान और अन्य फिल्मी दुनियां लॉरेंस विश्नोई की हिंसा से सुधर जाएगी, यह कहना मुश्किल है। विश्नोई समाज का जंगल और जानवरों के प्रति सहानुभूति और स्नेह भी सर्वविदित है।
      हम लॉरेंस विश्नोई गिरोह की हिंसा का भी समर्थन नहीं करते हैं पर पुलिस, कोर्ट और सरकार अपनी अपनी भूमिका निभाती तो फिर लॉरेंस विश्नोई जैसी चुनौती सामने नहीं आती, सलमान खान भी जेल के अंदर होता ।
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*आचार्य श्रीहरि*
*9315206123*
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