संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना में माताओं ने रखा निर्जला व्रत, सुंदरी नदी तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
लखीमपुर, 3 अक्टूबर। संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए मनाया जाने वाला पवित्र जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया व्रत) आज शनिवार को लखीमपुर में श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर व्रत रखने वाली माताओं ने पूरे दिन कठिन निर्जला उपवास रखकर अपने पुत्रों के दीर्घ एवं सुखमय जीवन की कामना की।
शाम के समय बड़ी संख्या में व्रतधारी महिलाएं लखीमपुर शहर के मध्य स्थित सुंदरी नदी तट पर निर्मित स्थायी छठ पूजा घाट पर पहुंचीं। महिलाओं ने नदी तट पर स्नान एवं ध्यान करने के बाद विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित कर भगवान की आराधना की गई तथा संतान की रक्षा, दीर्घायु और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की गई। घाट पर देर शाम तक श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा।
महाभारत से जुड़ी है व्रत की पौराणिक मान्यता
जीवित्पुत्रिका व्रत के संबंध में एक प्रमुख पौराणिक कथा महाभारत काल से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा ने पांडवों के वंश को समाप्त करने के उद्देश्य से द्रौपदी के पांच पुत्रों का वध कर दिया था। बाद में उसने अभिमन्यु के गर्भस्थ पुत्र परीक्षित को भी ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से नष्ट करने का प्रयास किया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने दिव्य प्रभाव से गर्भ में पल रहे परीक्षित के प्राणों की रक्षा की। इसी कारण जीवित्पुत्रिका व्रत को संतान की रक्षा और दीर्घायु से जोड़कर देखा जाता है।
एक अन्य लोकमान्यता में जीमूतवाहन की कथा का विशेष महत्व बताया जाता है। कथा के अनुसार, जीमूतवाहन ने नागवंश के एक बालक के प्राणों की रक्षा के लिए स्वयं को गरुड़ के सामने समर्पित कर दिया था। उनके त्याग और करुणा से प्रसन्न होकर गरुड़ ने नाग बालक को जीवनदान दिया। इसी त्याग और संतान की रक्षा की भावना से जुड़ी मान्यता के कारण जीवित्पुत्रिका व्रत में माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और रक्षा के लिए कठिन उपवास करती हैं।
मातृत्व की श्रद्धा और त्याग का प्रतीक
जीवित्पुत्रिका व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि मां के त्याग, प्रेम और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पुत्रों के कल्याण के लिए कठोर उपवास करती हैं और पूजा-अर्चना के बाद व्रत का पारण करती हैं।
लखीमपुर में भी इस पावन अवसर पर माताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किए गए पूजा-अनुष्ठान के बीच सुंदरी नदी तट पर पूरा वातावरण धार्मिक आस्था से सराबोर रहा।