राष्ट्र चिंतन-नेहा राठौर के सिर पर वैश्या की लाठी 

-कंगना को वैश्या कहने पर कभी बजाई थी ताली, बीजेपी से मांग रही है न्याय

एबीवीपी न्यूज ने नेहा राठौर को सरेआम वैश्या कह दिया और इस संबंध में स्टोरी चला दिया। इस पर नेहा राठौर आहत है। इस पर कांग्रेस , मुस्लिम और कम्युनिस्ट गिरोह ने कोई नोटिस नहीं लिया। क्योंकि कांग्रेस, मुस्लिम और कम्युनिस्ट गिरोह एवीबीपी न्यूज से नाराजगी मोल लेना नहीं चाहते हैं। एवीबीपी न्यूज कांग्रेस, मुस्लिम और कम्युनिस्ट समूह का ही बाजा बजाता है। इसलिए कांग्रेस, मुस्लिम और कम्युनिस्ट जमात नेहा राठौर के समर्थन में नहीं आई। जबकि नेहा राठौर चाहती थी कि एवीबीपी न्यूज की इस करतूत और धूर्तता के खिलाफ सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित मुस्लिम और कम्युनिस्ट की तमाम हस्तियां बोलते और उनके समर्थन में सोशल मीडिया पर आवाज उठाते। लेकिन नेहा राठौर को सहानुभूति नहीं मिली। सहानुभूति नहीं मिलने पर वह बौखलाई भी है।

        अब वह उस बीजेपी से सहानुभूति चाहती है , समर्थन चाहती है, जिस बीजेपी के खिलाफ वह अभियान चलाती थी, योगी आदित्यनाथ को भ्रष्ट और कामचोर कहती थी। यूपी में क्या बा, भ्रष्टाचार बा, घूसखोरी बा, बीजेपी के लुट बा, कहकर बीजेपी की खिल्ली उड़ाती थी। नरेंद्र मोदी को चोर कहती थी, मुस्लिम और विखंडन कारियों के पक्ष में मुजरा तुकबंदी गीत गाती थी। उस समय खासकर कम्युनिस्टों और मुस्लिम जमात नेहा राठौर को सिर आँखो पर बैठाई हुई थी। पैसे उस पर खूब बरस रहा था। जैसा कि सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया गत आरोप है।

      एक ही तुकबंदी को बार बार उगलने से वह बासी हो गई थी, उसके दर्शक और श्रोता घट गए थे, इधर कांग्रेस और मुस्लिम जमात ने कई अन्य देशद्रोही और हिंसक तथा विखंडन कारी यूट्यूबरो को खड़ा कर दिया, जिससे नेहा राठौर की चमक धमक समाप्त हो गई, उसकी तुकबंदी शक्तिहीन हो गई, उबाऊ और अनर्थ हो गई। यूटयूब से होने वाली कमाई भी घट गई, मुस्लिम और कांग्रेस जमात से मिलने वाली आर्थिक शक्ति भी कमजोर हो गई। इधर चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस, कॉकरोचों के आंदोलन में भी नेहा राठौर को कोई चमक नहीं मिली, कोई पूछ नहीं हुई, कोई ध्यान तक नहीं दिया, चुनाव आयोग चोर है उसकी तुकबंदी पर भी हंगामा नहीं हुआ, कोई हलचल नहीं हुई, कॉकरोचों ने भी हाथों हाथ नहीं लिया। मजा मार गई नेहा बोरा। इस कारण नेहा राठौर अवसाद में थी, गुस्से में भी थी।

           इधर नेहा राठौर को एवीबीपी न्यूज ने मुंह मांगी मुराद दे दिया। एवीबीपी ने उसे वैश्या क्यों कहा, किस आधार पर कहा, यह तो जांच का विषय है, पुलिस ही इस पर रहस्योद्घाटन कर सकती है।  एक महिला को सरेआम वैश्या कहना दुस्साहस की बात है। बीजेपी का समर्थन करने वाला चैनल भी नहीं है एबीवीपी। नेहा राठौर को पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी। लेकिन उसने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई। आखिर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई?  पुलिस में शिकायत दर्ज कराई होती तो फिर एबीवीपी न्यूज को सबक मिलता और नेहा राठौर को सहानुभूति भी मिलती। अब सोशल मीडिया पर रोज रोज महिला अपमान का रोना धोना क्यों? इसके पीछे कारण  भी लोकप्रियता हासिल करना है।

        नेहा राठौर की गुस्ताखी देखिये, धूर्तता देखिए, बेशर्मी देखिए। उसने एबीवीपी न्यूज द्वारा वैश्या कहने का मामला बीजेपी के महिला नेत्रियों को सोशल मीडिया एक्स पर टैग कर रही है और कह रही है कि क्या मै देश की बेटी नहीं हूं, देश की बेटी का यह अपमान आपको का कचोटता नहीं है, परेशान नहीं करता है, चिंतित नहीं करता है, आप मुंह क्यों नहीं खोल रही हैं, एवीबीपी न्यूज के खिलाफ क्यों नहीं बोल रही है, आइए हमारे साथ और मुझे न्याय दिखाइये। लोग आश्चर्य में हैं कि बीजेपी की मदद क्यों चाहती है नेहा राठौर? क्या वह बीजेपी की नजदीक आना चाहती है? अपना पश्चाताप करना चाहती है या फिर बीजेपी की सत्ता का लाभ उठाना चाहती है?    

        अनेकानेक हस्तियां दलबदलू साबित हुए हैं, विचारधारा खोर साबित हुई हैं, गिरगिट साबित हुई हैं। बीजेपी को सांप्रदायिक कहने वाले लोग और मोदी को संहारक कहने वाले लोग एकाएक बीजेपी और मोदी के समर्थक बन गए, इतना ही नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार में  लाभ वाले पद पर आसीन भी हो गए। क्या नेहा राठौर भी ऐसी ही मंशा रखती है?

           नेहा राठौर कितना धूर्त है, कितना अवसर वादी है और कितना प्रपंच वाली महिलावादी है, तथा कितना महिला की अस्मिता की पैरबीकर है, कितना सम्मान देती है, यह भी देख लीजिए। कंगना राणावत प्रकरण को हम याद करते हैं। कांग्रेस की राष्ट्रविरोधी हरकतों का विरोध कंगना राणावत करती है, शुचिता के प्रकरण पर कंगना राणावत ने कांग्रेस की आलोचना की थी, फिर कांग्रेस तिल मिला गई थी, बौखला गई थी। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत्र ने कंगना राणावत को वैश्यां कह दिया था, इस पर किसी कम्युनिस्ट नेता या फिर नेहा राठौर ने विरोध नहीं किया था। तब नेहा राठौर ने कांग्रेस के पक्ष में तालिया बजाई थी। स्मृति ईरानी का जब कांग्रेस ने जगहसाई की थी, स्मृति ईरानी पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थी तब भी नेहा राठौर ने विरोध नहीं किया था, महिला सम्मान की बात नहीं उठाई थी। जब उद्धव ठाकरे ने कंगना राणावत का मुंबई स्थित घर तोड़वाया था तब भी नेहा राठौर खामोश थी। महिला सम्मान की एकांकी व्याख्या नहीं चलेगी, एकांकी सोच नहीं चलेगी। महिला सम्मान की चहुमुखी व्याख्या की होती और स्मृति ईरानी, कंगना राणावत की अस्मिता का समर्थन किया होता तो आज नेहा राठौर के पक्ष में बीजेपी की नेत्रियां जरूर सामने आती और एवीबीपी न्यूज को सबक सिखाती।

        अंधे के हाथ में बटेर लग गया। यानी कि  गुमनाम में जाने वाली और हाशिए पर खड़ी हो गई नेहा राठौर के हाथ में एक अवसर  आ गया। इस अवसर को भुनाने में कोई कसर नही छोड़ना चाहती है, हर बंधन और हर परंपरा को तोड़ कर अपने लिए लोकप्रियता प्राप्त करना चाहती है। एक ऐसा वर्ग भी है जो एबीवीपी न्यूज और नेहा राठौर के बीच वैश्या  के प्रकरण को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। एक बड़े समूह की संदेह दृष्टि क्या है ? संदेह दृष्टि मिलीभगत की है। कहीं  एवीबीपी न्यूज  और नेहा राठौर लोगों को मूरख तो नहीं बना रहे हैं, दोनों टीआरपी का खेल खेल कर हमें मूरख तो नहीं बना रहे हैं। लोकप्रियता हासिल करने के लिए न्यूज चैनल और बदनाम हस्तियां कुछ भी कर सकती हैं। नेहा राठौर को वैश्या कहने मात्र से एबीवीपी न्यूज की टीआरपी बढ़ी है, उसकी नेहा राठौर की वैश्या वाली स्टोरी को लोग खोज खोज कर देख रहे हैं, दिलचस्पी भी चरम पर है।  जबकि नेहा राठौर भी चर्चा में बरकरार है। बदनाम तो हुआ पर नाम तो हुआ?

         थोड़े देर के लिए हम यह मान लें कि अगर नेहा राठौर को किसी बीजेपी नेता, बीजेपी संस्थान, बीजेपी समर्थक मीडिया ने वैश्या कहा होता तो फिर कैसी विरोध की प्रकिया होती, राजनीति किस प्रकार गर्म होती, तथाकथित बुद्धिजीवी जमात किस प्रकार उछलती, मीडिया किस प्रकार महिला सम्मान की बात पर बीजेपी का मानमर्दन करता? तब  कम्युनिस्ट समर्थक प्रगतिशील महिला संगठन सड़को पर उतर चुका होता, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी राजनीतिक बखेड़ा कर देते, पप्पू मिडिया बीजेपी को महिला  विरोधी घोषित कर दिया होता। पुण्य प्रसून वाजपेयी, रवीश कुमार, अजीत अंजुम , अभिसार शर्मा जैसे  पप्पू मीडिया के लोग गदर काटे होते। पर नेहा राठौर को वैश्या कहने पर भी पुण्य प्रसून वाजपेयी, रवीश कुमार, अजीत अंजुम अभिसार शर्मा आदि एवीबीपी के खिलाफ चुप्पी साधकर बैठ गए हैं, मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं है, इनकी मीडिया स्वतन्त्रता की दोहरी चाल भी स्पष्ट हो गई, फिर से स्थापित हो गई।

    निश्चित तौर पर एबीवीपी न्यूज द्वारा नेहा राठौर को वैश्या कहने पर इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया की अराजकता और गुंडई, वसूली मानसिकता बेपर्द हो गई।  नेहा राठौर को भी अपने पूर्व की करतूतों से सीख लेनी होगी, कांग्रेस द्वारा कंगना राणावत को वैश्या कहने जैसी करतूत पर नेहा राठौर को तालियां बजाने की हरकत करने से बाज आना चाहिए। जब खुद के शरीर पर लाठी बजती हैं तब चोट और दर्द पीड़ा का अहसास होता है।

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 *आचार्य श्रीहरि* 

 *9315206123* 

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