राज्यपाल परनायक ने आदि समुदाय से सोलुंग की परंपराओं और पूर्वजों के ज्ञान को संरक्षित करने का आग्रह किया

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के. टी. परनायक ने आदि समुदाय से अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने तथा पूर्वजों से विरासत में मिले ज्ञान, मूल्यों और परंपराओं को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया है।

सोलुंग के अवसर पर अपने संदेश में राज्यपाल ने इस पारंपरिक त्योहार को आदि समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन की एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति और दैवी शक्तियों के प्रति समुदाय की गहरी आस्था और कृतज्ञता को दर्शाता है तथा प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करता है।

राज्यपाल परनायक ने कहा कि सोलुंग पीढ़ियों से चली आ रही बुद्धिमत्ता, मूल्यों और परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने समुदाय के बुजुर्गों से युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करने का आग्रह किया, ताकि युवा पारंपरिक रीति-रिवाजों को समझें, उनका सम्मान करें और उन्हें व्यवहार में अपनाएं। उन्होंने कहा कि बदलते समय के बीच भी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत जीवंत और प्रासंगिक बनी रहनी चाहिए।

सोलुंग आदि समुदाय का एक प्रमुख पारंपरिक फसल उत्सव है, जिसका संबंध कृषि, कृतज्ञता और अच्छी फसल तथा समृद्धि के लिए प्रार्थनाओं से है। यह पर्व सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करता है। इस दौरान पारंपरिक अनुष्ठानों और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समुदाय के लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं।

राज्यपाल परनायक ने आदि समुदाय के साथ मिलकर किने नाने, दादी बोते, दोयिंग-बोते तथा अन्य कल्याणकारी देवताओं से शांति, सद्भाव, प्रगति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि सोलुंग लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से और मजबूत रूप से जोड़ने, विभिन्न समुदायों के बीच एकता बढ़ाने तथा अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध स्वदेशी विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने के सामूहिक प्रयासों को प्रेरित करेगा।

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