राजभाषा हिंदी राष्ट्रभाषा से अंतराष्ट्रीय पटल पर पृथ्वीराज ग्वाला हिंदी अनुवादक

असम विश्वविद्यालय शिलचर
 भारत के संविधान में हिंदी को राजभाषा का गौरव प्राप्त है। जन-जन के भाषा होने के कारण हिंदी राष्ट्रभाषा का सम्मान प्राप्त कर चुका है। सहज सरल भाषा होने के कारण लोग इस भाषा को देश के हर कोने में बोली जाती है। देश का एकता और अखंडता के लिए एक देसी भाषा होना जरूरी है और वह भाषा हिंदी है। भारत का स्वतंत्रताआंदोलन में भी इस बात को महसूस किया गया कि देश के लिए एक भाषा जरूरी है इसीलिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नेताजी सुभाष चंद्र बोस हिंदी को राष्ट्र बनाने की बात कहें है। भारत की स्वतंत्रता की आंदोलन में हिंदी अहम भूमिका निभाई है। हिंदी में  कविताएं गाने लोगों को स्वतंत्रता की आंदोलन में प्रेरित किया है। आज समय आया है कि हर स्कूल महाविद्यालय हिंदी की साथ साथ मातृभाषाओं की उन्नति किया जाए। भारत सरकार गृह मंत्रालय हर वर्ष हिंदी के प्रयोग के लिए महा सम्मेलन आयोजित कर रही है। केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो  हिंदी को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास रत है। हिंदी साहित्य सशक्त होने के कारण विश्व पटल पर अपना पहचान बनाई हुई है। विश्व के विभिन्न विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जाती है । हिंदी से रोजगार की अपार संभावना है। हिंदी अनुवादक हिंदी अधिकारी पत्रकारिता जैसे छेत्र  मैं  काम कर ने का अपार संभावना है।भारतीय साहित्य संस्कृति को जानने के लिए हिंदी साहित्य  भिन्न भिन्न भाषा मे अनुवाद किया जाता आ रहा है। 140 करोड़ भारतीय 140 करोड़ बाजार को पकड़ने के लिए भी हिंदी हिंदी सीख रहे हैं विश्व के विभिन्न देश के व्यापार  वर्ग। जय हिंदी

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