राजपुर में 11 करोड़ के मिनी स्टेडियम का भूमिपूजन, दो वर्षों के भीतर काम पूरा करने का लक्ष्य

शमीन्द्र पाल, काठीघोड़ा, 16 अगस्त : काछार के पश्चिम काठीघोड़ा के राजपुर में खेल के बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। यहां करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन मिनी स्टेडियम का रविवार को औपचारिक भूमिपूजन किया गया। भूमिपूजन के माध्यम से परियोजना के निर्माण कार्य का शुभारंभ काठीघोड़ा के विधायक कमलाक्ष दे पुरकायस्थ ने किया।

परियोजना सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मिनी स्टेडियम के निर्माण के लिए आवश्यक करीब 32 बीघा जमीन जालालपुर चाय बागान प्रबंधन की ओर से दान की गई है। पहले चरण में 10 करोड़ 93 लाख रुपये की लागत से स्टेडियम के बुनियादी ढांचे का निर्माण पूरा करने की योजना है। इसके बाद दूसरे चरण में 10 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित होने की जानकारी मिली है। यानी पूरी परियोजना में निवेश की राशि पहले चरण के आवंटन की तुलना में काफी अधिक होगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित समय-सारणी के अनुसार काम आगे बढ़ने पर आगामी दो वर्षों के भीतर मिनी स्टेडियम का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के साकार होने पर पश्चिम काठीघोड़ा सहित आसपास के क्षेत्र के खेलप्रेमियों और उभरते खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।

इस दिन के भूमिपूजन समारोह में भाजपा के चार मंडल अध्यक्ष विशालाक्ष देव, नित्य गोपाल दास, मिथुन शुक्लवैद्य और निरापद देव उपस्थित थे। इसके अलावा जिला परिषद सदस्य पम्पी दास, प्रमिला वैष्णव और त्रयोवासी दास, काठीघोड़ा के सर्किल ऑफिसर यात्राकांत कर्मकार, वरिष्ठ भाजपा नेता सुखेंदु कर, काठीघोड़ा लोक निर्माण विभाग (बिल्डिंग) के एसडीओ गुणेंद्र शर्मा सहित अन्य अधिकारी, ठेकेदार रत्नदीप दास पुरकायस्थ तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

राजपुर में इस मिनी स्टेडियम के निर्माण की पहल को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्सुकता देखी जा रही है। विधायक कमलाक्ष ने परियोजना को निर्धारित समय के भीतर पूरा किए जाने की उम्मीद जताई। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पश्चिम काठीघोड़ा के खेल क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा साबित होगा।

वहीं, करीब 11 करोड़ रुपये के इस कार्य के भूमिपूजन के अवसर पर आयोजित सभा की व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठे। तेज धूप के बीच नीले रंग की तिरपाल लगाकर और चारों ओर कुछ कपड़े टांगकर सभा का आयोजन किया गया। इससे उपस्थित कई लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा। उपस्थित लोगों में से कई ने सवाल उठाया कि चूंकि दिन रविवार था और स्कूल भी बंद था, इसलिए पास स्थित स्कूल भवन में सभा का आयोजन किया जा सकता था।

आरोप है कि केवल सभा स्थल की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि भोजन के पैकेट को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। आरोप लगाया गया कि विशिष्ट अतिथियों के लिए अपेक्षाकृत बड़े मिठाई के पैकेट में बेहतर गुणवत्ता की सामग्री दी गई, जबकि अन्य लोगों को छोटे पैकेट दिए गए। इसे लेकर सवाल उठा कि आखिर यह भेदभाव क्यों? इसके साथ ही पीने के पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई। इस मामले को लेकर उपस्थित लोगों के बीच नाराजगी और व्यंग्यात्मक टिप्पणियां भी सुनने को मिलीं।

जानकारी के अनुसार, पूरे आयोजन की जिम्मेदारी कार्य का ठेका प्राप्त करने वाले ठेकेदार की थी। हालांकि, इस संबंध में संबंधित ठेकेदार की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

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