राखी का त्योहार ( सरसी छंद )

भाई को कुंकुम तिलक लगा, करें बहन मनुहार,

प्रेम डोर से सजी कलाई, राखी का त्योहार ।

संजोए प्यारी सी स्मृतियॉं, बूॅंदों की बौछार,

बचपन की ये प्रीत निराली, खुशियों की झंकार ।

रिश्तों का रंगीला सावन, त्यौहारों की धूम,

राखी लाई ढेरों खुशियॉं, झूला झूलें झूम ।

भाई और बहन का रिश्ता, बंधन है मासूम,

बहन प्यार से भाई का झट, लेती माथा चूम ।

भाई धीरे से फिर देता, सुंदर सा उपहार,

बहना तू है मेरे दिल का, चमकीला सा हार ।

तू जो करती चिंता मेरी, बढ़-चढ़कर हरबार,

कितना चाहें तुझे सताऊॅं, करता तुझसे प्यार ।

रहें सदा खुश मेरी बहना, रखना है ये ध्यान,

बड़े प्रेम से अमिय भाव का , भाई रखता मान ।

बहना भी कर जोड़ ईश से, मॉंगें ये वरदान,

खुशहाल रहें भाई मेरा, गाऊॅं मंगलगान ।

एक दूसरे का मन से दें, पूरा-पूरा साथ,

भाई और बहन थामें है, बचपन से ये हाथ ।

उपजे “आनंद” अनंत सदा, परम्परा की रीत,

परिवार में हॅंसी-खुशी बसें, सजें सुनहली प्रीत ।

– मोनिका डागा “आनंद”, चेन्नई 

आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद 

रचना स्वरचित और सर्वाधिकार सुरक्षित

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