बकाया वेतन, पीएफ, कथित अनियमितताओं और संपत्ति हस्तांतरण के मामलों पर बनेगी रणनीति; प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से हस्तक्षेप की मांग होगी
समाचार एजेंसी दिल्ली, 5 अगस्त: देश के संघर्षशील पत्रकार संगठनों के महासंघ (कन्फेडरेशन) ने समाचार एजेंसी यूएनआई (यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया) से जुड़े गंभीर मामलों पर इस माह के तीसरे सप्ताह में एक आपात बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। बैठक में वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों के बकाया भुगतान, भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े मुद्दों, कथित फर्जीवाड़े के माध्यम से नाममात्र कीमत पर कंपनी के स्वामित्व को ‘द स्टेट्समैन’ को हस्तांतरित किए जाने, यूएनआई में लगाए गए निवेश की वैधता तथा दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में खाली कराई गई सरकारी भूमि पर वर्तमान प्रबंधन द्वारा किए गए कथित अवैध निर्माण जैसे मामलों पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही, इन मुद्दों को लेकर आगे की आंदोलनात्मक रणनीति भी तय की जाएगी।
यह जानकारी बुधवार को सार्क जर्नलिस्ट्स फोरम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील भारती, कन्फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स ऑर्गेनाइजेशन्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र शर्मा तथा सेव यूएनआई मूवमेंट की लीगल सेल के वरिष्ठ सदस्य एवं दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अरविंद कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से दी।
सुशील भारती ने कहा कि उनका संगठन लंबे समय से यूएनआई से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रखे हुए है। उन्हें उम्मीद थी कि संस्था, उसके वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी प्रक्रियाएं कानूनी दायरे में और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चापलूस कर्मचारियों की मिलीभगत से गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि धन के स्रोत की निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर देशव्यापी आंदोलन भी शुरू किया जाएगा।
डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर यूएनआई को एक निष्क्रिय होती कंपनी के हाथों सौंप दिया गया। उनका कहना था कि जिस व्यक्ति ने पहले कभी शेयरधारक रहते हुए यूएनआई की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, वही बाद में मूल्यवान भूमि और अन्य परिसंपत्तियों के लालच में रिसीवर के माध्यम से संस्था का एकमात्र नियंत्रक बन बैठा।
वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार चौधरी ने कहा कि वर्तमान प्रबंधन के खिलाफ सभी कानूनी पहलुओं का गंभीरता से परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पूरे प्रकरण में व्यापक अनियमितताएं हुई हैं और इनकी सीबीआई जांच की मांग को लेकर शीघ्र ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद लुटियंस दिल्ली स्थित 9, रफी मार्ग की हजारों करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी भूमि कथित कब्जाधारियों से मुक्त कराई गई है, जिसे उन्होंने एक ऐतिहासिक कदम बताया।