मोरान तिलौई एनआरसी की क्षमता बढ़कर १० बेड हुई, कुपोषण के खिलाफ अभियान को मिली मजबूती

डिब्रूगढ़: डिब्रूगढ़ जिला स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में मोरान तिलौई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) बच्चों में गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) से लड़ाई में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।

केंद्र की सेवाओं के विस्तार के तहत एनआरसी की बेड क्षमता ८ से बढ़ाकर १० बेड कर दी गई है। अतिरिक्त २ बेड का औपचारिक उद्घाटन २ सितंबर २०२६ को असम सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव तथा डिब्रूगढ़ जिले की प्रभारी सचिव पुबाली गोगोई, एसीएस ने किया।

एनआरसी में गंभीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित ५ वर्ष से कम उम्र के बच्चों का उपचार, स्वास्थ्य स्थिरीकरण और पुनर्वास किया जाता है। बच्चों को उनकी माताओं या देखभाल करने वालों के साथ भर्ती किया जाता है, जहां उन्हें समग्र पोषण एवं चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जाती है।

जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष २०२४-२५ में केंद्र में ११८ बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें से १०९ बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ हुए। वर्ष २०२५-२६ में ११२ बच्चों को भर्ती किया गया और इनमें से १०६ बच्चे स्वस्थ हुए। चालू वित्त वर्ष २०२६-२७ में अगस्त तक ६२ बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें से ६१ बच्चे उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं।

वर्तमान में केंद्र का ७० प्रतिशत बेड ऑक्यूपेंसी रेट (बीओआर) दर्ज किया जा रहा है। वहीं, पिछले दो वर्षों में फॉलो-अप की संख्या ७८ से बढ़कर १०१ हो गई है। यह नियमित निगरानी और देखरेख के प्रभाव को दर्शाता है।

चिकित्सकीय उपचार के अलावा एनआरसी में कुपोषण की दोबारा स्थिति उत्पन्न होने से रोकने के लिए परिवार-केंद्रित परामर्श पर भी जोर दिया जाता है। माताओं और देखभाल करने वालों को विशेष स्तनपान, पूरक आहार, घर पर पौष्टिक भोजन तैयार करने, खाद्य पदार्थों के पोषण संवर्धन तथा स्वच्छता संबंधी व्यवहारिक जानकारी दी जाती है।

एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी पहल के तहत स्वास्थ्य विभाग भर्ती बच्चों के साथ केंद्र में रहने वाली माताओं या देखभाल करने वालों को उपचार अवधि के दौरान होने वाली आर्थिक परेशानी कम करने के लिए प्रतिदिन २०० रुपये की मजदूरी क्षतिपूर्ति भी प्रदान करता है। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।

इस योजना के तहत वर्ष २०२५-२६ में कुल २ लाख ६४ हजार ४०० रुपये की राशि वितरित की गई, जबकि चालू वित्त वर्ष २०२६-२७ में अगस्त तक १ लाख ४४ हजार ६०० रुपये प्रदान किए जा चुके हैं।

मोरान तिलौई एनआरसी ने डिब्रूगढ़ जिले से बाहर भी अपनी पहुंच बनाई है। यह केंद्र पड़ोसी जिलों और क्षेत्रों, जिनमें चराईदेउ, शिवसागर और डिमौ शामिल हैं, के परिवारों के लिए भी एक भरोसेमंद स्वास्थ्य सुविधा बन गया है।

डिब्रूगढ़ जिला स्वास्थ्य विभाग तथा एनआरसी के चिकित्सकों, आहार विशेषज्ञों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के संयुक्त प्रयासों से केंद्र गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। केंद्र का उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से उबारकर उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर वापस लाना है।

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