मुख्यमंत्री के बयान के विरोध में 335 घंटे का अनशन, तीन मांगें रखीं

गुवाहाटी, 16 अगस्त: असम के इतिहास, संस्कृति तथा उग्रवादी हिंसा से जुड़े अतीत को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के कथित बयान के विरोध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक स्वयंसेवक हितेश्वर चक्रवर्ती ने 16 अगस्त से 30 अगस्त तक 335 घंटे के अनशन की घोषणा की है। चक्रवर्ती ने इस संबंध में जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि उनका आंदोलन लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा है।

चक्रवर्ती के अनुसार, हाल में सार्वजनिक स्थान से गायक एवं कलाकार जुबिन गर्ग की तस्वीर हटाए जाने को लेकर उठे विवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने 10 जुलाई की एक प्रेस वार्ता में कहा था कि यदि कोई क्रांतिकारी की तस्वीर बनाना चाहता है तो चे ग्वेरा की जगह उल्फा नेता परेश बरुआ की तस्वीर बनाए। चक्रवर्ती ने इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब परेश बरुआ के नेतृत्व वाले उल्फा को भारत सरकार ने प्रतिबंधित संगठन घोषित कर रखा है, तो मुख्यमंत्री द्वारा उसकी तस्वीर बनाने का आह्वान किस संदर्भ में किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उल्फा के हिंसक आंदोलन के दौरान आरएसएस के कई प्रचारकों और स्वयंसेवकों सहित बड़ी संख्या में लोगों की हत्या हुई थी। उन्होंने कहा कि 16 अगस्त 1991 को बरपेटा में आरएसएस प्रचारक प्रमोद मनोहर दीक्षित की हत्या की गई थी। इसी प्रकार 30 अगस्त 2005 को आरएसएस के नलबाड़ी विभाग प्रमुख शुक्लेश्वर मेधी की भी उल्फा द्वारा हत्या किए जाने का उन्होंने उल्लेख किया।

चक्रवर्ती ने कहा कि इन दोनों तिथियों को ध्यान में रखते हुए 16 अगस्त से शुरू किया गया अनशन 30 अगस्त को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान पर आरएसएस और भाजपा नेतृत्व की कथित चुप्पी से बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों में निराशा और आक्रोश है।

तीन प्रमुख मांगें

अनशनकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष तीन मांगें रखी हैं। पहली, मुख्यमंत्री 10 जुलाई के कथित बयान को सार्वजनिक रूप से वापस लेते हुए माफी मांगें अथवा पद से इस्तीफा दें। दूसरी, मुख्यमंत्री के विरुद्ध राजद्रोह का मामला दर्ज किया जाए। तीसरी, भारत सरकार उल्फा पर लगाए गए सभी प्रतिबंध हटाकर संगठन को लोकतांत्रिक सामाजिक संगठन के रूप में मान्यता दे।

प्रेस विज्ञप्ति में चक्रवर्ती ने कहा कि इस मामले से संबंधित जानकारी देश की राष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री और असम के राज्यपाल को लिखित रूप से दी जा चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है।

उन्होंने नागरिकों और मीडिया से अपील की कि इस अनशन कार्यक्रम को व्यापक रूप से सामने लाया जाए। चक्रवर्ती ने अपने परिचय में स्वयं को गुवाहाटी के पानबाजार निवासी, सामान्य नागरिक तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक बताया है।

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